बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को जनपद बलरामपुर में 803 करोड़ से अधिक लागत की 78 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने का आफर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश जी, मैं आपको ऑफर करता हूँ आप भी अयोध्या से नामांकन करिये, मैं भी करता हूँ, चलिए एकबार किस्मत आजमा लिया जाए !
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जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मुझसे कहते हैं कि मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखा दें। अरे अखिलेश जी ! अयोध्या हमारा पावन धाम है, मैं इसलिए जाता हूँ कि जिससे अयोध्या के विकास में कोई कोताही न हो, उत्तर प्रदेश के पहचान पर कोई कलंक न लगे ! जिस अयोध्या को तुम 3, 4 घण्टे बिजली देते थे, जिस अयोध्या को तुमने गंदगी का अंबार बना दिया था, आज वह अयोध्या रामराज्य का उदाहरण बनकर त्रेतायुग का स्मरण करवा रही है। मैं आपको ऑफर करता हूँ आप भी अयोध्या से नामांकन करिये, मैं भी करता हूँ, चलिए एक बार किस्मत आजमा लिया जाए ! तय हो ही जाए। लड़ाई चेलों से क्यों, लड़ाई सामने होनी चाहिए !
योगी ने कहा कि ये माफिया के सामने नाक रगड़ने वाले, उनकी कब्र पर फातिहा पढ़ने वाले लोग, ये हमसे क्या लड़ेंगे, इनकी हिम्मत नही है, जनता पहले भी इनकी छुट्टी कर चुकी है। ये खिसियानी बिल्ली खंभा नाेचे जैसा हैं।
जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आपका एक वोट जो कभी पहचान का संकट खड़ा करता था। इस क्षेत्र को तस्करी का क्षेत्र बनाता था। वही वोट आज तस्करी नहीं, इस क्षेत्र के तरक्की का कारण बन रहा है। वही वोट इस क्षेत्र में बदमाशों की अराजकता का नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के बदलाव का कारण बन जाता है। एक वोट यहां के विकास का आधार बनकर परिवर्तन की नई धारा के साथ आगे बढ़ाकर आकांक्षात्मक जनपद से आगे बढ़ाकर संभावना वाले जनपद के रूप में सफल होता है।
योगी ने कहा कि पिछली सरकारों में अराजकता कैसे होती थी, जिस जमीन पर माफिया पैर रख देता था, उस जमीन पर उसका कब्जा हो जाता था। समाजवादी गुंडे जिस व्यापारी को फोन करके धमका देते थे, उसकी प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लेते थे। इस क्षेत्र में विकास की बात क्या करें, 2017 के पहले सबसे खराब सड़के इसी जनपद की होती थीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने कहा कि विपक्ष के लोग आज मोदी जी का विरोध कर रहे हैं, विरोध की भी अपनी एक सीमा होती है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अब सामान्य शिष्टाचार भी भूल गए हैं। लोकतांत्रिक विरोध से अब ऊपर उठकर के विपक्ष बेशर्मी के साथ गाली-गलौज की भाषा में सारे संस्कारों को तिलांजलि देकर के, ये लोग देश को गुमराह करके अराजकता की ओर बढ़ाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।


