Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में ‘भारत टैक्सी’ एवं ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का शुभारंभ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, सहकारिता एवं नागर विमानन Murlidhar Mohol भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के ई-पोर्टल, उर्वरक सेतु मोबाइल ऐप तथा उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव डाटाबेस सेंटर के मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया गया। साथ ही, भारत टैक्सी एवं विभिन्न संस्थाओं के मध्य MoU का आदान-प्रदान किया गया तथा भारत टैक्सी के पांच सारथियों को शेयर प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों को ऋण के चेक वितरित किए गए। वहीं, सहकारिता विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम के लाभांश का चेक मुख्यमंत्री जी को प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का उद्देश्य किसानों को खेती में आवश्यक निवेश के लिए अपेक्षाकृत कम ब्याज पर दीर्घकालीन ऋण उपलब्ध कराना है। यह ऋण सिंचाई सुविधाओं, कृषि मशीनरी और खेती से जुड़ी स्थायी परिसंपत्तियों के लिए उपयोग किया जा सकता है। योजना के अंतर्गत अधिकतम ₹6 लाख तक ऋण और 6 प्रतिशत ब्याज दर का प्रावधान बताया गया है। निर्धारित समय पर किस्तों का भुगतान करने वाले किसानों को ब्याज अनुदान की सुविधा मिलेगी।
योजना के शुभारंभ से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से किसानों को पहले लगभग 11 से 11.5 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिलता था। अब मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत ब्याज दर 6 प्रतिशत करने की जानकारी दी गई है। सरकार ने आगामी पांच वर्षों में करीब पांच लाख लघु और सीमांत किसानों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा है। योजना के लिए ₹384 करोड़ की स्वीकृति का लक्ष्य भी रिपोर्टों में बताया गया है।हालांकि, योजना के बजट आवंटन और ब्याज अनुदान की वास्तविक वित्तीय संरचना की पुष्टि के लिए आधिकारिक शासनादेश और बजट दस्तावेज देखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के ई-पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसानों को योजना से संबंधित जानकारी और आवेदन प्रक्रिया तक पहुंच उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।
किसान सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखाओं के माध्यम से भी योजना की पात्रता, दस्तावेज और ऋण स्वीकृति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। योजना की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसका मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों पर है। ऋण स्वीकृति बैंक की निर्धारित पात्रता और दस्तावेजों की जांच के आधार पर होगी। किसानों को आवेदन से पहले योजना की आधिकारिक शर्तें, ऋण की वापसी अवधि, ब्याज अनुदान की पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संबंधित बैंक से प्राप्त करनी चाहिए।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सहकारिता क्षेत्र की भूमिका पर भी बात की। रिपोर्टों में सहकारी बैंकों की स्थिति, किसानों तक खाद और कृषि सुविधाएं पहुंचाने तथा डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने का उल्लेख है। इसी कार्यक्रम में उर्वरक सेतु मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव डेटाबेस सेंटर से जुड़ा मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया।



