वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार शाम कश्मीरीगंज में स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिलापूजन किया। जगदगुरु रामानंदाचार्य काशी पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती महाराज सहित अन्य संतों की मौजूदगी में शिलान्यास हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित किया।
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मुख्यमंत्री याेगी ने कहा कि सवा सात सौ वर्षों के आध्यात्मिक परम्परा के नवीनीकरण के लिए आयोजित शिलान्यास में आना सौभाग्य की बात है। स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती महाराज ने अपने गुरु विरासत को नया स्वरूप भव्य राम मंदिर बनाने का संकल्प लिया है। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि एक समृद्ध विरासत को देखा है। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 को 500 वर्षो के इंतजार के बाद भगवान राम लला को विराजमान होते हमने देखा। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर निर्माण और श्रीरामजन्म भूमि आंदोलन में आरएसएस के नेतृत्व में संतों और विहिप नेता स्मृतिशेष अशोक सिंघल और कार्यकर्ताओं के संघर्ष का भी मुख्यमंत्री ने विस्तार से जिक्र किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, विहिप के महामंत्री अशोक तिवारी, संतोष दास सतुआ बाबा आदि संतों के अलावा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र, पूर्व मंत्री व शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, एमएलसी चंचल सिंह आदि भी मौजूद रहे।
श्रीराम मंदिर का इतिहास 627 से भी पुराना
कश्मीरी गंज स्थित प्राचीन श्रीराम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए आज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी आधारशिला रखी। इस मंदिर का इतिहास 627 साल पुराना है। इस मंदिर का निर्माण 1398 में हुआ था। वर्ष 1669 में औरंगजेब ने इसे ध्वस्त करा दिया। सन 1700 में फिर से मंदिर का निर्माण हुआ। पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामकमलाचार्य वेदांती महाराज ने पत्रकारों को बताया कि केदारखंड में खोजवां का यह क्षेत्र काशी की अयोध्या के रूप में जाना जाता है। करीब 8,000 स्क्वायर फीट में मंदिर का निर्माण होगा। इस मंदिर की स्थापना 1398 में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के शिष्य अनंतानंदाचार्य ने की थी। इस मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास जी के हाथ से लिखी पांडुलिपियां अब भी सुरक्षित रखी गई हैं। उन्होंने इस मंदिर में लगभग पांच वर्ष तक अध्ययन किया था।