नई दिल्ली : नेशनल काउंसिल आॅफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के सिलेबस में भारत के महाकाव्य रामायण और महाभारत शामिल हो सकते हैं। इन्हें स्कूल के इतिहास के सिलेबस में भारत के क्लासिकल पीरियड की कैटेगरी में रखा जा सकता है। एनसीईआरटी के ही हाईलेवल पैनल सोशल साइंस कमेटी ने इसकी सिफारिश की है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि रामायण-महाभारत किस क्लास के किस चैप्टर में पढ़ायी जायेंगी।
दरअसल, एनसीईआरटी की सोशल साइंस कमेटी स्कूलों में इस विषय के पाठ्यक्रम को फिर से तय करने के लिए बनायी गयी है। कमेटी यह भी प्रस्ताव है कि इंडियन नॉलेज सिस्टम तैयार किया जाये। किताबों में वेद और आयुर्वेद को भी शामिल किया जाये। कमेटी ने ये सिफारिश भी की है कि टेक्स्ट बुक में इंडिया की जगह भारत लिखा जाये।
यह प्रस्ताव एनसीईआरटी की नयी टेक्स्ट बुक बनाने में मददगार रहेंगे। हालांकि, इन प्रस्ताव को अभी एनसीईआरटी से अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। एनसीईआरटी इस मामले में अक्टूबर में कहा था कि सिलेबस को नये तरीके से डेवलप करने की प्रक्रिया चल रही है। इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हम कुछ कहेंगे तो वह मीडिया में आ जायेगा, यह अच्छा नहीं होगा।
प्रो. सीआई आईजैक ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि पैनल ने यह प्रस्ताव भी रखा कि स्कूल की हर क्लास में दीवार पर संविधान की प्रस्तावना लिखी जाये। यह क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए। आईजैक इतिहास के रिटायर्ड प्रोफेसर हैं।
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