युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए अभियान शुरू करेगा संघ

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झुंझुनूं: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देशभर में वर्ष 2024 तक एक लाख शाखाएं संचालित करने का संकल्प लिया है। वर्तमान में 56,824 शाखाएं हैं, जिनकी संख्या आगामी दो वर्ष में एक लाख तक बढ़ाई जाएंगी। राजस्थान के झुंझुनूं स्थित खेमी शक्ति मंदिर में संघ के प्रांत प्रचारकों की तीन दिवसीय बैठक में इसे लेकर व्यापक चर्चा हुई है। अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के शनिवार को समापन पर संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सरसंघचालक डॉ. मोहन भावगत ने देश के 45 प्रांतों से आए प्रांत प्रचारकों और सह प्रांत प्रचारकों के साथ वर्षभर की गतिविधियों की समीक्षा की और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी विचार विमर्श किया। श्री आंबेकर ने बताया कि विशेष रूप से संघ के शताब्दी वर्ष 2025 के संबंध में इस तीन दिवसीय बैठक में विशेष चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पूर्व में इसके लिए व्यापक कार्य विस्तार योजना वर्ष 2021 में बनाई गई थी। वह योजना तीन साल की थी। कार्य विस्तार को लेकर एक साल के कार्यों की समीक्षा प्रांत प्रचारक बैठक में की गई है। जब वर्ष 2021 में शाखाओं को एक लाख करने का संकल्प लिया गया था तब शाखाओं की संख्या 55 हजार थी। फिलहाल अब तक यह संख्या 56 हजार से अधिक हुई है, लेकिन अगले दो साल में यह संख्या एक लाख हो जाएगी। बैठक में इसके लिए प्रांत, जिला और मंडल स्तर तक के लिए कार्ययोजना बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि संघ युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए भी अभियान शुरू करेगा। इसके तहत 15 जुलाई से देशभर में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन होंगे। वर्ष 2022 में स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। संघ की ओर से इसके अंतर्गत कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में मुख्य बिन्दु स्व के जागरण को रखा गया है। चाहे बात स्वभाषा की हो, स्वदेशी की हो या फिर स्वतंत्रता या स्वाधीनता की, इसी स्व के भाव को आगे बढ़ाते हुए संघ स्वावलम्बी जैसे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा। आजादी के आंदोलन में ऐसी अनाम उत्सर्ग करने वाली विभूतियों को समाज के सामने लाने का कार्य चल रहा है, जिन्हें आज कोई नहीं जानता।‘काली’ फिल्म के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में आंबेकर ने कहा कि क्रिएटिव फ्रीडम भारत की परम्परा है, लेकिन इस फ्रीडम का उपयोग करते हुए हर व्यक्ति को दूसरों की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए। दूसरों की भावना आहत नहीं हो और न ही किसी दूसरे के भावना का अनादर हो, यह हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उदयपुर में कन्हैयालाल तेली की हत्या के सवाल पर उन्होंने घटना की निंदा की और कहा कि इसकी जितनी भर्त्सना की जाए उतनी कम है।

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