नई दिल्ली: 17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहने वाला है. यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य किसी चमकदार छल्ले की तरह दिखाई देगा. वैज्ञानिक इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते हैं.
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यह एक वलयाकार या कंकण सूर्य ग्रहण होगा. इस तरह के ग्रहण में सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा ठीक केंद्र में आ जाता है, जिससे सूर्य किनारों से किसी चमकदार रिंग की तरह दिखाई देता है. खगोलविद इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के लगभग 96 फीसदी हिस्से को ढक देगा. यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहने वाला है.
साल 2026 में दो सूर्य ग्रहण रहने वाले हैं. 17 फरवरी के बाद साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा. यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में जगह लेगा. यह सूर्य ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा. यह सूर्य ग्रहण कनाडा, उत्तर-पूर्वी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन, फ्रांस, इटली, ब्रिटेन जैसे देशों में दिखाई देगा.
सूर्य या चंद्र ग्रहण लगने से कुछ घंटे पहले सूतक काल लागू हो जाता है. सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लगता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में शुभ-मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. इसमें देवी-देवताओं की पूजा-पाठ, मूर्तियों का स्पर्श और खान-पान भी वर्जित होता है.
इस सूर्य ग्रहण के साथ एक बड़ा ही दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस दिन कुंभ राशि में सूर्य-राहु-बुध-शुक्र-चंद्रमा का पंचग्रही योग भी रहेगा. यह संयोग करीब 37 साल बाद बन रहा है. इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 1989 में बना था. ज्योतिषविदों इस संयोग को महत्वपूर्ण मान रहे हैं.
हालांकि 17 फरवरी को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.


