-वेद मनुष्यता का नियामक:डा.प्रसून दत्त
PURWI CHAMPARAN ।महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मानविकी एवं भाषा संकाय के तत्वावधान में मंगलवार वेदाध्ययन की परंपरा और आधुनिक सन्दर्भ विषयक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रसून दत्त सिंह अधिष्ठाता, मानविकी एवं भाषा संकाय ने की।
प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा कि आधुनिक समाज अपनी उद्घोषणाओं में निरंतर समतामूलक समाज की स्थापना की बात करता है। किंतु ज्ञान- विज्ञान परंपरा एवं तमाम ज्ञानानुशासनों का केंद्र वेद अपने मूल में व्यापक है। इसमें कहीं भी किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं है।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री (प्रसिद्ध वैदिक विद्वान एवं अवकाश प्राप्त आचार्य, आर. आर. पी. जी. महाविद्यालय, अमेठी, उत्तर प्रदेश) ने कहा कि सृष्टि की सभी भाषाओं का प्रदुर्भाव वेद से हुआ है। सभी विद्याओं का केंद्र वेद है। धर्म का मूल वेद है। आधुनिक ज्ञान प्रणाली की अभ्यस्त आज की युवा पीढ़ी अपने प्राचीन ग्रंथों से दूर हो रही है।
अपनी परंपराओं से शुभ, सुंदर, कोमल ग्रहण करने से बच रही है। लेकिन ज्ञान मार्ग का राही बनने के लिए हमें अपनी थाती की ओर लौटना होगा। यहीं से आत्मिक शुद्धता का सूत्र प्राप्त होगा। डॉ. ज्वलंत कुमार शास्त्री ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से वेद, संस्कृत और विज्ञान के अंतर्सबंध को व्याख्यायित किया।प्रो.आर्तत्राण पाल, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण ने अपने उद्बोधन में संस्कृत भाषा की प्रयोजनीयता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बिमलेश कुमार( अध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार) एवं कार्यक्रम का व्यवस्थित ओजस्वी संचालन डॉ. विश्वेश वाग्मी( सहायक आचार्य, संस्कृत, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार) ने किया। इस दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया।