रांची। रांची के कडरू स्थित एक्सट्रीम बार के डीजे संदीप प्रमाणिक हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अभिषेक सिंह सहित 10 लोगों की आपराधिक अपील पर बुधवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने मामले के प्रारंभिक अनुसंधान में खामियां मिलने और कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों के अभाव पर नाराजगी जताई। अदालत ने रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को चार नवंबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने जानना चाहा कि मामले का अनुसंधान सही तरीके से नहीं करने वाले अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई की गई है या नहीं। अदालत ने जांच में सामने आई कमियों पर असंतोष जताते हुए एसएसपी को तलब किया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में अपर न्यायायुक्त शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने अभिषेक सिंह उर्फ विक्की सहित 10 दोषियों को नौ-नौ वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। सभी को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था।
सजा पाने वालों में अभिषेक सिंह, अशोक कुमार सिंह, मोहम्मद शामिरूदीन, प्रतीक, मृत्युंजय कुमार, प्रकाश कुमार, दिवाकर उपाध्याय, आलोक दीवा, पंकज कुमार और सुमित कुमार शामिल हैं। सभी ने निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल के रहने वाले डीजे संदीप प्रमाणिक की 26 मई 2024 की देर रात रांची के कडरू स्थित एक्सट्रीम बार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, घटना की रात कुछ युवकों का बार के कर्मचारियों से विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई। हालांकि, उस समय मामला शांत होने के बाद युवक वहां से चले गए थे। आरोप था कि मारपीट का बदला लेने के लिए अभिषेक सिंह अपने साथियों के साथ दोबारा बार पहुंचा। वह सेल सिटी स्थित अपने किराए के आवास से राइफल लेकर आया और संदीप प्रमाणिक को गोली मार दी। गोली लगने से संदीप की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद आरोपित ने पार्किंग क्षेत्र से बार की ओर कई राउंड फायरिंग की और कार से फरार हो गया था।
घटना के अगले दिन तड़के रांची के एसएसपी और सिटी डीएसपी ने घटनास्थल पहुंचकर जांच की तथा बार के कर्मचारियों से पूछताछ की थी। पुलिस ने बार में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली थी। फुटेज में विवाद और गोलीबारी की घटना कैद होने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए मुख्य आरोपित सहित 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।


