हजारीबाग। सीपीआईएम जिला कमेटी, हजारीबाग ने शहीद महेन्द्र सिंह के शहादत दिवस पर गोष्ठी का आयोजन कर कॉमरेड महेन्द्र सिंह और उनकी पत्नि स्वर्गीय शांति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक व्यक्त किया। गोष्ठी की अध्यक्षता इश्वर महतो और संचालन अंजू देवी ने किया। जिला सचिव गणेश कुमार सीटू ने कहा कि यह बहुत ही संयोग की बात है कि जिस तारीख को कामरेड महेंद्र सिंह शहीद हुए ठीक उसी तारीख को 17 साल बाद (16-1-2022 )उनकी पत्नी का निधन हो गया है। कॉमरेड महेंद्र सिंह की हत्या 16 जनवरी को 2005 सरिया थाना क्षेत्र के दुर्गी धवाईया गांव में कर दी गई थी। महेंद्र सिंह की निर्मम हत्या सिर्फ एक व्यक्ति या एक विधायक की हत्या नहीं थी बल्कि एक विचारधारा की हत्या थी।
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झारखंड राज्य के एक बेबाक, निडर और जुझारू नेता की हत्या थी. सैकड़ों उम्मीदों की , हजारों आशाओं की हत्या थी। महेंद्र सिंह की हत्या उन हजारों सपनों का टूट कर बिखर जाना था, जिन्हें उन्होंने गरीबों और पिछड़ों की आंखों में सजाया था। जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली उस आवाज की हत्या थी, जिससे जुल्म थर्राती थी और जिस पर पिछड़ों और शोषितों को नाज था। गरीब बेसहारों के हक और न्याय के लिए उठने वाली उस आवाज की हत्या थी, जिससे लाखों गरीब बेसहारों को न्याय की आस रहती थी।
16 जनवरी 2005 को झारखंड राज्य के गिरिडीह जिला के सरिया थाना क्षेत्र में एक ऐसी आंधी आई थी, जिसने झारखंड राज्य के एक जलते दीपक को बुझा दिया था, जिसके बुझते ही पूरे क्षेत्र में एक घनघोर अंधेरा छा गया था और इस अंधेरे में सैकड़ों घरों की रोशनी गुम हो गई थी। चारों तरफ एक मातमी सन्नाटा पसर गया था। महेंद्र सिंह 1990 में पहली बार भाकपा माले से विधायक बने और जनता जनार्दन के दिलो में इस तरह बसे कि अपने आखरी समय तक विधायक बने रहे। महेन्द्र सिंह चार बार विधायक रहें। इस गोष्ठी मे तपेस्वर राम भुईयां, ननकू राम गुलाब साव ,लक्ष्मी नारायण सिंह , सूरेश कुमार दास ,केदार राम सहित कई लोगों ने भाग लिया।



