रांची। झारखंड उच्च न्यायालय में मंगलवार को वर्ष 2018 से लापता गुमला की छह वर्षीय बच्ची की बरामदगी से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी), चैनपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) तथा मामले के अनुसंधानकर्ता (आईओ) अदालत में उपस्थित हुए और जांच की प्रगति से संबंधित जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में एक महिला आरोपित का नार्को टेस्ट कराने के लिए संबंधित निचली अदालत से अनुमति मांगी गई है। इस संबंध में बुधवार को सुनवाई निर्धारित है और अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। इसके बाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नई तिथि निर्धारित की।
अदालत ने गुमला के पुलिस अधीक्षक और चैनपुर के एसडीपीओ को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी। हालांकि, मामले के अनुसंधानकर्ता (आईओ) को अगली सुनवाई में भी अदालत के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि जांच की प्रगति पर सीधे जानकारी प्राप्त की जा सके।
उल्लेखनीय है कि गुमला जिले की छह वर्षीय बच्ची सितंबर 2018 से लापता है। बच्ची की बरामदगी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने झारखंड उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर उच्च न्यायालय लगातार सुनवाई कर रहा है और जांच एजेंसियों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट तलब कर रहा है।




