रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उनके नामांकन को रद्द करने की मांग को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बुधवार को विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। वहीं, भाजपा कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद विधानसभा परिसर के बाहर राजनीतिक तनाव का माहौल बन गया।
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कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग राज्यसभा चुनाव के मामलों में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मानदंड अपना रहा है। उनका कहना है कि परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में कथित तौर पर कई खामियां होने के बावजूद उन्हें सुधार का अवसर दिया गया, जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को तकनीकी आधार पर निरस्त कर दिया गया।
प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि यदि मध्य प्रदेश में सख्ती दिखाई गई है तो झारखंड में भी समान नियम लागू होने चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी प्रत्याशियों के साथ समान व्यवहार जरूरी है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
विधानसभा के गेट संख्या-2 पर आयोजित प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, राज्य सरकार के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, दीपिका पांडे सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक भी वहां पहुंचे और नारेबाजी करते हुए विधानसभा परिसर की ओर बढ़ने लगे।
इस दौरान कुछ कांग्रेस समर्थक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए विधानसभा परिसर के अंदर प्रवेश कर गए। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों और कुछ कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में झंडे लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए और परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द करने की मांग दोहराई।
कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच भाजपा कार्यकर्ता भी विधानसभा परिसर पहुंच गए और उन्होंने भी नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा विधायक सीपी सिंह ने विधानसभा परिसर में प्रवेश को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थकों को विधानसभा परिसर के अंदर जाने दिया गया, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं को गेट पर ही रोक दिया गया। उन्होंने इसे दोहरी नीति बताते हुए नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले की शिकायत विधानसभा सचिव से की जाएगी। भाजपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन को सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से विधानसभा परिसर के बाहर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए लगातार निगरानी बनाए रखी।
राजनीतिक हलचल और प्रदर्शन के बीच राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस विवाद पर रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में सुनवाई भी जारी रही। परिमल नाथवानी के नामांकन पर दर्ज आपत्तियों को लेकर चल रही इस प्रक्रिया में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा, झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम तथा परिमल नाथवानी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अब सभी की नजर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर टिकी हुई है। यह निर्णय न केवल राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करेगा, बल्कि झारखंड की राजनीति में चल रही सियासी खींचतान को भी नया मोड़ दे सकता है।




