भागलपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता अश्विनी कुमार चौबे ने रविवार को एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के निर्णय एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की है और वे सदैव छात्र एवं युवा शक्ति की आवाज को समझने वाले नेता रहे हैं।
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चौबे ने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर धर्मेंद्र प्रधान का निर्णय भले ही देर से आया हो, लेकिन राष्ट्रहित एवं छात्रहित में यह स्वागत योग्य कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पूर्व में नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी गंभीर अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कानून बनाने का निर्णय लिया है। यह शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक साहसिक कदम है, जिसके दूरगामी और व्यापक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, ने छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास किया। छात्रों की वास्तविक पीड़ा और समस्याओं को समझने के बजाय उन्हें गुमराह कर आंदोलन को हिंसात्मक स्वरूप देने की कोशिश की गई। हालांकि, उनका यह प्रयास सफल नहीं हुआ। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। लोकतंत्र के मंदिर संसद में संवाद, चर्चा और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही हर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है।
अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि मैं स्वयं छात्र आंदोलनों और लोकतांत्रिक संघर्षों की परंपरा से आया हूं। वर्ष 1966-67 में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी. सहाय के विरुद्ध चले छात्र आंदोलन में मैंने अग्रणी भूमिका निभाई। इसके बाद वर्ष 1974-76 के जेपी आंदोलन और आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए गिरफ्तारी दी और जेल गया।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान मुझे अमानवीय यातनाएं दी गईं। गर्म सलाखों से दागा गया और महीनों तक अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करना पड़ा। लेकिन लाखों जेपी सेनानियों के साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प ने अंततः आपातकाल के उस काले अध्याय को समाप्त किया और तानाशाही कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर किया।



