नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के पक्ष में 10 सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर उन्हें समर्थन का ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधि मंडल में पूर्व न्यायाधीश समेत पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, सेना के अधिकारी शामिल थे। सीएए के समर्थन में गए डेलिगेशन ने राष्ट्रपति से मिलकर सीएए के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के खिलाफ चिंता जाहिर की और 149 प्रशासनिक अधिकारियों का समर्थन वाला ज्ञापन सौंपा।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए डेलीगेशन में शामिल सिक्किम उच्च न्यायलय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली ने कहा कि देश भर में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं, वो राजनीति से प्रेरित हैं। हम सभी गैर राजनीतिक लोग हैं लेकिन जिम्मेदार लोग हैं और देश के उतने ही हितैशी हैं जितने विरोध करने वाले अपने आप को बताते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को विरोध करने का अधिकार है लेकिन प्रदर्शन चिन्हित स्थानों पर सभ्य तरीके से होना चाहिए। देश के अंदर जो भारत विरोधी बातें चल रही हैं, कश्मीर और असम की आजादी की बातें की जा रही हैं, वह देश के हित में नहीं हैं। इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सीएए को जो भी लोग राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं उन्हें सोचना चाहिए कि इससे आम नागरिक पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। शाहीन बाग के मुद्दे पर कहा कि कुछ खबरों के अनुसार प्रदर्शनकारियों को पैसे बांटे जा रहे हैं, तो देश के लिए इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकता है।
डेलिगेशन में शामिल केरल के पूर्व मुख्य सचिव आनंद बोस ने बताया कि हमने मुख्यतौर पर तीन बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का महत्वपूर्ण स्थान हैं लेकिन जब विरोध के स्वर हिंसा में तब्दील हो जाए, तो समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। दूसरी बात पहले सत्ता में काबिज लोगों ने भी इन तीन देशों से आए लोगों को नागरिकता दी थी। मौजूदा सरकार ने तो देश की भावनाओं को देखते हुए यह ठोस कदम उठाया है। इसलिए इसे अपनाने के साथ इसे लागू किया जाना चाहिए। तीसरी बात कि जब संसद के दोनों सदनों से यह कानून पारित हो गया तो अब वो देश का कानून है जिसे सभी को स्वीकार करना चाहिए।
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