रांची। झारखंड की दो सीटों पर हुए उपचुनाव महागठबंधन को जीत हासिल हुई है। बेरमो में कांग्रेस प्रत्याशी कुमार जयमंगल अपने पिता की विरासत बचाने में कामयाब हो गए हैं। दूसरी ओर दुमका में मुख्यमंत्री के हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन ने पूर्व मंत्री लुईस मरांडी को पराजित कर दिया है। जयमंगल ने अपने प्रतिद्वंद्वी योगेश्वर महतो बाटुल को 14 हजार से भी अधिक वोटों से हराया है। झामुमो के बसंत सोरेन ने लुईस मरांडी को 6 हजार से भी अधिक वोटों से हरा दिया है। दुमका में 18वें और अंतिम राउंड की गिनती के बाद बसंत सोरेन 6440 वोटों से आगे हैं। उन्हें 79964 वोट जबकि भाजपा की लुईस मरांडी को 73524 वोट प्राप्त हुए हैं।
कद़दावर कांग्रेसी पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह के निधन से रिक्त हुई इस सीट पर सबकी निगाहें लगी थी कि जयमंगल यहां कमाल कर पाते हैं नहीं। मतगणना के 15वें राउंड की समाप्ति के बाद कुमार जयमंगल 14004 वोटों से आगे चल रहे हैं। उन्हें 92402 वोट प्राप्त हुए हैं। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो बाटुल को 78353 मत प्राप्त हुए हैं। इस बढ़त को पाट पाना भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो बाटुल के लिए मुश्किल लग रहा है। वहीं, अपने गढ़ दुमका को बचाने में झामुमो को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। यहां दस राउंड की गिनती के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन भाजपा प्रत्याशी डाॅ लुईस मरांडी से लगातार पीछे चल रहे थे।
लेकिन 14वें राउंड की गिनती के बाद बसंत सोरेन 5080 वोटों से आगे चल रहे हैं। उन्हें 63239 वोट जबकि भाजपा की लुईस मरांडी को 58159 वोट मिले हैं। बसंत सोरेन की निगाहें ग्रामीण क्षेत्रों के मतों पर लगी हैं, जहां पिछली बार झामुमो को काफी वोट मिले थे। यहां अगर वह भाजपा को रोकने में कामयाब रहे, तभी उनकी जीत संभव है। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन दुमका और बरहेट दोनों सीटों से चुनाव जीते थे। बाद में उन्होंने दुमका सीट छोड़ दी थी। दुमका झामुमो का गढ़ माना जाता है। पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन यहां से छह बार सांसद रहे हैं।
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