गरीबी को मात देकर फुटबॉलर पूर्णिमा ने बनाई पहचान

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सिमडेगा : जिले के छोटे से गांव जामबाहर पतराटोली की पूर्णिमा कुमारी अब किसी पहचान की मोहताज नहीं रही। छोटे से गांव में जन्मी पूर्णिमा ने गरीबी से संघर्ष करते हुए ऊंचा मुकाम हासिल किया है। पूर्णिमा कुमारी का चयन अंडर-17 फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप की टीम के लिए हुआ है। इससे जामबाहर पतराटोली गांव के लोग काफी खुश है। पूर्णिमा कुमारी बचपन से ही फुटबॉल और हॉकी दोनों खेलने में बहुत तेज थी। किंतु अपने कैरियर के लिए पूर्णिमा ने फुटबॉल का चुनाव किया। ग्रामीण स्तर पर छोटी उम्र में ही पूर्णिमा ने कई कप और शील्ड जीते। गांव में फुटबॉल मैदान नहीं था किंतु उबड़ खाबड़ जमीन में खेलते हुए पूर्णिमा वर्ल्ड कप खेलने तक का सफर तय किया। पूर्णिमा को आगे बढ़ने में बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ा।

शिशु काल में ही पूर्णिमा की माता का निधन हो गया। इसके बाद उनकी बड़ी बहन सनमीत कुमारी अपनी खुशियों को तिलांजलि देते हुए मां बनकर पूर्णिमा को पाल पोस कर बड़ा किया। इसके बाद स्वयं मजदूरी करके पूर्णिमा को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हमेशा उसे प्रेरित करती रही और हर सुविधा मुहैया कराने के लिए दिन रात काम करती रही।

पूर्णिमा के पिता खेती किसानी करते हैं । खेती से उनकी उतनी आमदनी नहीं होती इसके बाद घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी भी करना पड़ता है। अत्यंत गरीबी की मार झेल रहे पूरा परिवार पूर्णिमा को आगे बढ़ाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पूर्णिमा कुमारी का पहली बार भारतीय टीम में 2019 में चयन हुआ था। किंतु पासपोर्ट समय से नहीं मिलने के कारण वह टीम में नहीं जा सकी थी। इसके बाद हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने उनका सहयोग किया।

इसके बाद पासपोर्ट बन गया। 2019 में ही भारतीय टीम से खेलने के लिए पूर्णिमा भूटान गई । बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया वर्तमान में पूर्णिमा कुमारी अंडर-17 फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए चयनित है। जमशेदपुर में कैंप आयोजित किया गया है जिसमें पूर्णिमा कुमारी लगातार प्रशिक्षण ले रही है। परिवार का सपना है कि पूर्णिमा कुमारी इंटरनेशनल स्तर पर खेले और अपनी अलग पहचान बना कर अपने परिवार जिला और राज्य का नाम रोशन करें।