तालिबान को देखकर बांग्लादेश में सक्रिय हो रही है पाकिस्तान की ISI, भारत की बढ़ी मुश्किलें

0 641

कोलकाता। अफगानिस्तान में तालिबानियों के कब्जा करने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बांग्लादेश में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इससे भारत की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इससे प्रमुख बांग्लादेशी पत्रकार और बुद्धिजीवी भी चिन्तित है। आईएसआई की मदद की वजह से है स्वाभाविक रूप से बीएनपी और जमात सहित इस्लामी गुटों को नया जीवन मिला है। आईएसआई अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए तरह-तरह के सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रही है।

इस संबंध में लेखक और पत्रकार समिति के अध्यक्ष शहरियार कबीर ने कहा कि आईएसआई सीधे बांग्लादेश में आतंकवादी समूहों का समर्थन कर रहा है। तालिबान ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अब इस्लामी समूह बांग्लादेश पर कब्जा करने के लिए काम कर रहे हैं। कबीर ने दावा करते हुए कहा कि ढाका में पाकिस्तान उच्चायोग ने बांग्लादेशी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज, शिक्षाविदों और मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ कई व्हाट्सएप ग्रुप लॉन्च किए हैं। यह यू-ट्यूब के माध्यम से विभिन्न प्रकार की झूठी जानकारियां फैला रहा है। इससे पहले भी आईएसआई ने भारत के खिलाफ बांग्लादेशी क्षेत्र का उपयोग करने की कोशिश की है। अगर सरकार आईएसआई में शामिल लोगों की पहचान करने में विफल रहती है, तो बांग्लादेश में स्वतंत्रता समर्थक बलों को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

शहरयार कबीर ने बताया कि 2015 में ढाका में पाकिस्तान उच्चायोग से दूसरे सचिव फरीना अरशद को आतंकवादी संलिप्तता के आरोप में वापस बुला लिया था। इसी तरह से 2016 में आतंकवादी समूह जेएमबी के साथ एक सौदे के दौरान हिरासत में लिए गए वीजा अधिकारी मजहर खान को भी वापस बुला लिया गया था। दुनिया के अन्य स्थानों की तरह, आईएसआई अब सोशल मीडिया के माध्यम से ढाका में अपने नापाक इरादों को अंजाम दे रहा है।

आईएसआई की गतिविधियों पर विस्तार से बताते हुए बांग्लादेशी पत्रकार लेकुज्जमां ने कहा कि तालिबान को सत्ता में लाने के बाद आईएसआई अब बांग्लादेश में अगले चुनाव के लिए आतंकवादी समूहों को सबसे आगे लाने की कोशिश कर रहा है। समूहों में सरकार विरोधी लोग शामिल हैं। इसके लिए भारी मात्रा में पैसा खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आईएसआई हमेशा सक्रिय रहा है। हालांकि, अफगानिस्तान के कब्जे के बाद से तालिबान अधिक सक्रिय हो गए हैं। व्यापार असमानता, फरक्का-तीस्ता बांध और भारत में मुसलमानों के उत्पीड़न को फर्जी तरीके से सोशल मीडिया के जरिए फैलाया जा रहा है।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व मीडिया सलाहकार इकबाल शोभन चौधरी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचनाओं के प्रसार पर चिंता व्यक्त की है। जब दुनिया कोरोनावायरस जैसी महामारी से निपटने के लिए संघर्ष कर रही है। सामूहिक रूप से महामारी के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार की गलत सूचना, झूठी सूचना फैलानाए मित्र राष्ट्रों के बीच दूरी और विभाजन पैदा कर सकता है। इसके बाद बिगड़े हुए हालात क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बिगाड़ने वाले होंगे।