रांची। झारखंड में सड़क दुर्घटनाएं गंभीर सामाजिक और मानवीय चुनौती बनती जा रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2026 के दौरान राज्य में 3,078 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 2,478 लोगों की मौत हुई। यानी छह महीने में औसतन हर दिन करीब 17 दुर्घटनाएं हुईं और करीब 14 लोगों की जान गई।
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पिछले वर्षों के आंकड़े भी सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2021 में 3,513, 2022 में 3,898, 2023 में 4,173 और 2024 में 4,114 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई। वहीं 2025 में जनवरी से नवंबर तक 4,111 मौतें दर्ज की गईं। इन अवधियों के आंकड़ों को जोड़ने पर मृतकों की संख्या 19,809 होती है। हालांकि 2025 का आंकड़ा नवंबर तक और 2026 का जून तक का है, इसलिए इन्हें संबंधित वर्षों का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
रांची में सबसे अधिक दुर्घटनाएं
राज्य पुलिस मुख्यालय के जनवरी से जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, रांची में सबसे अधिक 408 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 286 लोगों की मौत हुई। धनबाद में 208 हादसों में 118, हजारीबाग में 195 में 163 और गिरिडीह में 194 हादसों में 180 लोगों की जान गई।
पलामू में 170 दुर्घटनाओं में 135, बोकारो में 169 में 125, पूर्वी सिंहभूम में 166 में 117, गुमला में 150 में 136, दुमका में 134 में 122 और रामगढ़ में 126 हादसों में 107 लोगों की मौत हुई।
देवघर में 121 दुर्घटनाओं में 86, सरायकेला-खरसावां में 125 में 107, पश्चिमी सिंहभूम में 117 में 114, चतरा में 84 में 77, सिमडेगा में 83 में 82, लातेहार में 83 में 65, गोड्डा में 72 में 64 और साहिबगंज में 69 हादसों में 55 लोगों की मौत हुई।
लोहरदगा में 58 दुर्घटनाओं में 51, कोडरमा में 58 में 42, जामताड़ा में 45 में 41 और पाकुड़ में 43 दुर्घटनाओं में 42 लोगों की जान गई।
गिरिडीह, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा जैसे जिलों के आंकड़े विशेष ध्यान आकर्षित करते हैं, जहां दुर्घटनाओं की संख्या की तुलना में मृतकों का आंकड़ा काफी अधिक है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर दुर्घटनाओं के कारणों का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए सड़क की स्थिति, वाहनों की गति, दुर्घटना के प्रकार और घायलों को चिकित्सा सुविधा मिलने में लगे समय जैसे पहलुओं का अध्ययन जरूरी है।


