बच्चों में वायरल बुखार के बढ़ते मामले को लेकर स्वास्थ मंत्री ने 38 जिलों में जारी किया अलर्ट

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पटना। बच्चों में बढ़ते वायरल बुखार के मामले को लेकर सरकार की नींद अब टूटी है। सभी 38 जिलों को अलर्ट मोड पर रखा जा रहा है। अब बच्चों के इलाज की हर दिन की रिपोर्ट मुख्यालय आएगी, जिससे जिलों में मनमानी नहीं हो पाएगी। जिलों में इलाज की व्यवस्था सही नहीं होने से पीएमसीएच रेफर हो रहे बच्चों की समस्या को लेकर अब जिले में बेहतर इलाज की व्यवस्था बनाई जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सभी सिविल सर्जनों को अलर्ट किया है। पीएमसीएच, एम्स, आईजीआईएमएस, एनएमसीएच के साथ प्राइवेट अस्पतालों में जिलों से आने वाले मरीजों की संख्या अधिक हैं। इसमें सबसे अधिक बच्चे हैं। पीएमसीएच में तो 60 प्रतिशत बच्चे जिलों से रेफर होकर आए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का कहना है कि वायरल से पीड़ित बच्चों के बेहतर इलाज के लिए सभी सिविल सर्जनों को अलर्ट किया गया है। साथ ही सभी सदर अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में जांच और इलाज की विशेष व्यवस्था की जा रही है। अस्पतालों को पूरी तरह से तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। इसी क्रम में किसी बच्चे में वायरल, निमोनिया, स्वाइन फ्लू और जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसे संक्रमण के लक्षण मिलते हैं तो उस बच्चे को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर समुचित जांच और इलाज का निर्देश दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से निर्देश दिया गया है कि गंभीर रूप से बीमार बच्चे को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने के अलावा संबंधित की विस्तृत रिपोर्ट रोजाना मुख्यालय को भेजी जाए। दावा किया जा रहा है कि वायरल को लेकर सरकार की कार्रवाई काफी तेज कर दी गई है। सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में वायरल, निमोनिया, स्वाइन फ्लू और जेई जैसे संक्रमण से बचाव के लिए हर प्रकार की आवश्यक दवाइयां, जांच, डॉक्टर एवं नर्सेज की व्यवस्था की गई है।

स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों में वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों में से अधिकांश बच्चे स्वस्थ हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल और जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों को वायरल बुखार के मरीजों के इलाज में पूरी मुस्तैदी रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सा पदाधिकारी तथा आयुष चिकित्सकों को पूरी मुस्तैदी के साथ वायरल बीमारियों से संबंधित लक्षणात्मक बच्चों का समुचित उपचार करने को कहा गया है।