चाय बेचकर इंटरनेट पर छा गयी ये ग्रेजुएट चायवाली

डेली 1200 से 1500 तक कमा लेती है प्रियंका

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पटना : जिले के सबसे वीआइपी इलाकों में एक बेली रोड पर पटना वीमेंस कालेज के ठीक सामने ‘ग्रेजुएट चाय वाली की प्रियंका गुप्ता इंटरनेट पर छा गई हैं। केवल सात दिनों में ही उनकी दुकान चल निकली है। और अब वे अपनी दुकान को नई जगह पर विस्ता र देने की योजना बनाने में भी जुट गई हैं। मजे की बात है कि जब उन्होंेने यह दुकान खोलने का इरादा किया तो उनके पास कोई पूंजी भी नहीं थी। प्रियंका की दुकान पर कुल्हड़ चाय, पान चाय, मसाला चाय और चाकलेट चाय खासतौर पर सर्व की जाती है। इसकी कीमत 15-20 रुपये के बीच है। ग्राहकों को दुकान तक लाने के लिए प्रियंका ने स्टाल के आगे बैनर पर पंचलाइन ‘पीना ही पड़ेगा’, ‘और सोच मत.. चालू कर दे बस’, ‘लोग क्या सोचेंगे अगर, ये भी हम सोचेंगे, तो फिर लोग क्या सोचेंगे’ लिखा है। ये सभी पंचलाइन ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
‘एमबीए चाय वाला’ प्रफुल्ल बिलोर से मिली प्रेरणा
पटना वीमेंस कालेज की छात्राओं से घिरी ‘ग्रेजुएट चाय वाली’ प्रियंका ने बताया कि चाय बेचने का आइडिया ‘एमबीए चाय वाला’ प्रफुल्ल बिलोर का वीडियो देखने के बाद आया। प्रियंका की मानें तो यदि अपने जीवन में कुछ अलग करने की ठानी हो और उस लक्ष्य को लेते हुए आगे बढ़ते हैं तो आपको मंजिल जरूर मिलती है। वाराणसी से लौटने के बाद गांव से 30 जनवरी 2022 को पटना आईं। यहां आने के बाद जल्द से जल्द दुकान खोलने की ललक थी। शहर के कई चौक-चौराहों की चाय की दुकानों पर गईं और चाय बेचने का काम कैसे होता है, इसके बारे में जानकारी हासिल की।
बनारस से इकोनॉमिक्स में किया है ग्रेजुएशन
प्रियंका ने अर्थशास्त्र से स्नातक किया है। वह मूल रूप से पूर्णिया के बनमनखी की रहने वाली हैं। दो भाइयों से बड़ी 24 वर्षीय प्रियंका 2019 में वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद कई सालों तक प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी करती रहीं। परीक्षा में लगातार असफलता मिलने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्हों ने अपने गांव वापस जाने की बजाय पटना में चाय का ठेला लगा कर आत्मनिर्भर भारत का रास्ताअ चुना है।
दोस्तों की मदद से खुली दुकान
चाय की दुकान खोलने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंतने कई बैंकों से संपर्क किया, ताकि प्रधानमंत्री मुद्रा लोन स्कीम के तहत पैसे मिल जाए। उनका दावा है कि किसी बैंक ने कोई मदद नहीं की। इसके बाद दोस्तों से 30 हजार रुपये की मदद लेकर 11 अप्रैल को पटना वीमेंस कालेज के पास चाय की दुकान खोल दी। प्रियंका बताती हैं कि चाय के सबसे बड़ी ग्राहक वीमेंस कालेज की छात्राएं हैं, जो हमें सपोर्ट करने के साथ हौसला भी बढ़ाती हैं।
कम लागत में अच्छा मुनाफा
प्रियंका बताती हैं कि पिता प्रभाकर प्रसाद गुप्ता उर्फ जानी की किराने की दुकान पूर्णिया जिले के बनमनखी में है। जब भी गांव जाने का अवसर मिलता है तो पिता के साथ दुकान पर जाती और काम को समझने का अवसर भी मिलता। बिजनेस का माहौल बचपन से ही घर में देखा था। चाय बेचने का कार्य कम लागत में अच्छा मुनाफा देता है। कालेज के सामने सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक दुकान लगाने के बाद प्रतिदिन 12-15 सौ रुपये कमा लेती हैं। उनका इरादा आने वाले दिनों में वे श्रीकृष्ण पुरी पार्क में शाम के समय चाय की दुकान लगाने का है।