रांची: रूढ़िजन्य आदिवासी समन्वय समिति ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर जारी किए गए पेसा नियमावली 2025 पर अपनी आपत्तियां सौंपी।
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आपत्तियों में निम्नलिखित बातें कही गई हैं-
👉🏽नियमावली के कई प्रावधानों से प्रतीत होता है की पेसा क्षेत्र को सामान्य क्षेत्र की तरह ही देखा जा रहा है
👉🏽पेसा 1996 और कई सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार ग्राम सभा को सर्वोच्च स्थापित किया गया है । लेकिन वर्तमान नियमावली में कई प्रावधान इससे संगत नहीं हैं
👉🏽लोकतांत्रिक स्वशासन को पारंपरिक स्वशासन के ऊपर रखा जा रहा है । दोनों को शक्तियां दी जानी है , लेकिन दोनों के कार्य क्षेत्र अलग है । इसीलिए दोनों में अंतर करना चाहिए
👉🏽 पेसा 1996 के अनुसार , ग्राम सभा के गठन प्रक्रिया में रूढ़ियों को प्रधान रखा जाना है । किंतु वर्तमान नियमावली में ग्राम सभा की मान्यता और पारंपरिक सीमा के निर्धारण की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से जिला उपायुक्त को सौंप दी गई है । इससे रूढ़ियाँ गौण हो रही हैं ।
👉🏽 बहुस्तरीय व्यवस्था को विवादों के निपटारा हेतु अपीलीय प्राधिकार दिया गया है , उसे और कोई पहचान नहीं दी गई है । यह पूर्व प्रारूप से भिन्न है
👉🏽पूर्व प्रारूप में प्राकृतिक संसाधनों पर “सामुदायिक स्वामित्व” की पहचान दी गई थी । लेकिन वर्तमान नियमावली इसपर चुप है
इस प्रकार कई बिंदुओं पर आपत्ति सौंपी गई है और संशोधन का अनुरोध किया गया है ।
👉🏽 यह ग़लतियाँ ढूँढने का प्रयास नहीं है – बल्कि नियमावली को बेहतर बनने हेतु सरकार को संशोधन का प्रस्ताव दिया जा रहा है
⭐️⭐️संशोधन नहीं होने पर , रूढ़िजन्य समाज और आदिवासी पारंपरिक धरोहर को गहरी क्षति होने की आशंका है।




