रांची: श्रीराम नगर, चुटिया स्थित श्री राम मंदिर परिसर में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन श्रद्धा, उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में एकता, समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करना बताया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ चुटिया स्थित्त राममंदिर के प्रांगन से कलश यात्रा निकाली गयी जिसमे बड़ी संख्या में मातृशक्ति शक्ति ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया|
एवं इस शोभा यात्रा में हनुमान गाढ़ी में महंत एवं राम मंदिर के महंत जी को रथ पर बिठाकर कार्यक्रम स्थल तक गाजे बजे के साथ लाया गया |
कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभिक संबोधन में श्री राम मंदिर, चुटिया के महंत ने कहा कि सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह केवल संख्या नहीं, बल्कि जागृत और संगठित समाज की प्रतीक शक्ति है। उन्होंने वेद मंत्र “संगच्छध्वं संवदध्वं” का उल्लेख किया।
अयोध्या के हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संघ ने समाज को संगठित करने, राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने का निरंतर प्रयास किया है।
संघ के सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार ने अपने संबोधन में संगठन की शक्ति और एकता के महत्व को महाभारत के प्रसंग के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने देवताओं और असुरों के युद्ध की कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि बिखराव पराजय का कारण बनता है, जबकि एकता विजय का मार्ग प्रशस्त करती है। “संगच्छध्वं संवदध्वं संवो मनांसि जानताम्” मंत्र का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब लोग साथ चलते और साथ बोलते हैं, तो उनके मन भी एक हो जाते हैं, और यही एकता किसी भी चुनौती का सामना करने की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अपनी विविधता और उदारता के लिए जाना जाता है। अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, देवी-देवताओं के प्रति अलग-अलग आस्थाएँ और विभिन्न परंपराएँ हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं। किंतु समय-समय पर एक नाम और एक उद्देश्य के लिए संगठित होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए छुआछूत की भावना समाप्त करने का आह्वान किया। संत रविदास, मीराबाई और महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में जन्म नहीं, बल्कि कर्म और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
सम्मेलन में संत समाज के प्रतिनिधियों, मातृ शक्ति, गायत्री परिवार, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, मंदा पूजा समिति चुटिया तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में गिरधारीलाल महतो, विशाल जी, गोपाल शर्मा, मिथिलेश्वर मिश्र, अशोक प्रधान, राजीव बिट्टू, विजय कुमार, राजू शर्मा, शिवम केशरी, शंकर सिंह, रत्न केशरी, शैलेंद्र कुमार, अरुण कुमार, विक्रम शर्मा, महेंद्र जी एवं विभाग प्रचारक मंटू सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।




