पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वन प्रमंडल की ओर से गुरुवार को हाथी पीड़ित ग्रामीणों के बीच मुआवजा राशि का वितरण किया गया।
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डीएफओ अविरूप सिन्हा के नेतृत्व में ससंगदा रेंज अंतर्गत भनगांव और नवागांव के ग्रामीणों को सहायता राशि प्रदान की गई।
कार्यक्रम ससंगदा रेंज कार्यालय में आयोजित हुआ, जहां हाथियों के हमले में घर टूटने, फसल बर्बाद होने और जानमाल की क्षति झेलने वाले ग्रामीणों को लाखों रुपये के चेक सौंपे गए।
इस अवसर पर मुखिया लिपि मुंडा की मौजूदगी में वन विभाग के अधिकारियों ने शंकर पांडेय, बलदेव हेंब्रम, अमुश हेंब्रम, सुनील सुंडी, शालिनी कण्डुलना और बासुदेव बिरुआ ने लाभुकों को मुआवजा राशि वितरित की।
सहायता मिलने के बाद ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए वन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
वन विभाग ने बताया कि हाथियों के हमले में जिन ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हुए थे, उन्हें निर्धारित मुआवजा राशि दी गई। कुंजो नायक को 1 लाख 31 हजार 456 रुपये, रासाय सिन्दूर को 1 लाख 31 हजार 170 रुपये, बासमती देवी को 1 लाख 32 हजार 2 रुपये, परमिडा देवी को 1 लाख 31 हजार 300 रुपये तथा मिथुन नायक को 1 लाख 31 हजार 352 रुपये की सहायता प्रदान की गई।
फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को भी राहत दी गई। धर्मी देवी को 7 हजार 897 रुपये, राम सिद्धू को 2 हजार 633 रुपये तथा बिश्वनाथ सिंह को 4 हजार 17 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।
वन विभाग ने कई लाभुकों के बैंक खातों में सीधे मुआवजा राशि ट्रांसफर की। इनमें मेजरी चंपिया, नंदी सिधु, रंजीता देवी, रवींद्र मुंडा, सुकराम सुरीन, मणि तोरकोड, नरसिंह तोरकोड, मुकरू सिधु और बागी सिधु सहित कई ग्रामीणों के खातों में कुल 11 लाख 81 हजार 570 रुपये भेजे गए।
वन विभाग के अनुसार हाथी प्रभावित ग्रामीणों को कुल 22 लाख 53 हजार 397 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।
यह मुआवजा घर क्षति, फसल नुकसान और हाथी हमले में हुई मौत के मामलों में दिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से वन्यजीवों और वनों की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों की जानकारी तुरंत विभाग को दें और किसी भी स्थिति में हाथियों के साथ छेड़छाड़ न करें।
सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही सबसे बेहतर उपाय है। विभाग ने कहा कि मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए ग्रामीणों की भागीदारी बेहद जरूरी है और वन विभाग लगातार प्रभावित परिवारों की सहायता एवं सुरक्षा के लिए कार्य कर रहा है।




