रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने दुमका चौकीदार नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि महज तीन सेकंड की देरी के आधार पर किसी दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति का हकदार मानते हुए संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
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मामला विज्ञापन संख्या 01/2025 के तहत चौकीदार के 328 पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता दिव्यांग श्रेणी की अभ्यर्थी थी और लिखित परीक्षा में सफल हुई थी। हालांकि, शारीरिक परीक्षा के दौरान उसे सामान्य अभ्यर्थियों के साथ दौड़ में शामिल किया गया और कोई अतिरिक्त समय या विशेष सुविधा नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता ने दौड़ 10 मिनट 3 सेकंड में पूरी की थी। लेकिन निर्धारित समय से महज तीन सेकंड अधिक लगने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2(वाई) और धारा 20 के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों को उचित सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की वैधानिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने अपनी दलील के समर्थन में उच्चतम न्यायालय के विकास कुमार बनाम यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया के नियमों में अतिरिक्त समय देने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई नियम या सरकारी अधिसूचना संसद द्वारा बनाए गए कानून के प्रावधानों के विपरीत नहीं हो सकती।
अदालत ने माना कि दिव्यांग अभ्यर्थी को उचित सुविधा से वंचित करना कानून के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि दुमका में दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 13 पदों में से 11 पद रिक्त हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को चौकीदार पद पर नियुक्ति का हकदार घोषित किया और संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया।





