पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण जिले के बगहा, बैरिया प्रखंड के बथना, योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा एवं नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, बनकटवा तथा आस-पास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे कर स्थिति का जायजा लिया। साथ ही सारण जिले के मकेर प्रखंड अन्तर्गत हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे हुये तटबंध का भी ऐरियल सर्वे किया।
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पटना से पश्चिम चंपारण आने के क्रम में उन्होंने नदियों के जलस्तर एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भी हवाई सर्वेक्षण किया।
एरियल सर्वे के पश्चात् मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड तथा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए की गई आवासन व्यवस्था का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने सामुदायिक रसोई में स्वयं लोगों को भोजन परोसा। उन्होंने शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया तथा बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। चिकित्सा शिविर में उपलब्ध दवाओं एवं उपचार की व्यवस्था का भी जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि प्रभावित लोग अपनी समस्याओं एवं जरूरतों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराएं, ताकि उन्हें तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा सके।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने पीएम राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय, बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक की।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है। कोसी एवं महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए हर स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं तथा अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई का नियमित संचालन किया जाए। बाढ़ प्रभावित परिवारों को चिन्हित कर दशहरा से पहले 7,000 रूपये प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने पानी की निकासी के लिए आवश्यकता के अनुसार स्लुइस गेट खोलने, नदियों के जलस्तर, तटबंध एवं कटाव की सतत् निगरानी रखने तथा पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन एवं अन्य राहत सामग्री पहुंचाने तथा पशुओं के लिए भी समुचित चारा एवं आश्रय की व्यवस्था करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को एसओपी के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। बाढ़ से हुए नुकसान को दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक रसोई का संचालन तब तक जारी रखा जाए, जब तक लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट जाते और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती। एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की तैनाती सुनिश्चित रखते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी रखने का भी निर्देश दिया।


