चतरा। भगवान शिव के विवाह का पावन पर्व महाशिवरात्रि में पिछले 300 वर्षों के बाद पहली बार विशेष संयोग बनने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और आराधना हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला होगा।
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वहीं कई राशि के जातकों का भाग्योदय लेकर प्रकट होगा। महाशिवरात्रि फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।
इस संबंध में आचार्य पंडित चेतन पाण्डेय ने बताया कि महाशिवरात्रि के मौके पर इस वर्ष करीब 300 साल बाद पांच दुर्लभ राजयोग बन रहे हैं। महाशिवरात्रि पर बुध और शुक्र लक्ष्मी नारायण राज योग बना रहे हैं। बुध और सूर्य बुधादित्य राजयोग बना रहे हैं। सूर्य और शुक्र के मेल से शुक्रादित्य योग बन रहा है।
इसके अलावा कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र, शनि और राहु पंचग्रही राजयोग का निर्माण कर रहे हैं, जबकि श्रवण नक्षत्र और जय योग और सर्वार्थसिद्धि योग में शिव का उपासना का विशेष महत्व रहा है। इन पांच से छह शुभ योग का एक साथ बनना बहुत ही दुर्लभ माना जाता है। इस बार पुरे 300 वर्षों के बाद पहली बार ऐसा संयोग बन रहा है जो लोगों को समृद्धि दिलाने के साथ साथ हर मुश्किलों से दूर करने वाला होगा। ऐसे में इस पावन त्योहार पर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना विशेष लाभप्रद होगा।
उन्होंने कहा कि रविवार को पड़ रही महाशिवरात्रि पर सुबह से लेकर शाम तक पूजा किया जा सकेगा। सुबह में भगवान शंकर को जलाभिषेक के साथ दूध और अन्य पूजन-सामग्री अर्पण करने से विशेष फल की प्राप्ति कराने संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि व्यापिनी विशेष उत्तम माना जाता है। आचार्य ने कहा कि महाशिवरात्रि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी व्यापिनी निशा काल में मनाया जाता है। इस बार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को शाम 4.24 पर प्रवेश कर रहा है। चतुर्दशी तिथि अगले दिन 16 फरवरी दिन सोमवार को शाम 5.09 तक भोग करेगा। रात्रि व्यापनी चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है। ऐसे में महाशिवरात्रि रविवार को ही मनाया जाएगा। हालांकि इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ संयोग के साथ-साथ भद्रा भी लग रहा है। भद्रा 15 फरवरी को शाम 4.23 पर प्रारंभ होगा जो अगले दिन तडके सुबह 4.47 तक भोग करेगा। भद्रा का वास पाताल में होने के कारण शिव पूजन या महाभिषेक में कोई बाधा नहीं पहूंचेगी। बल्कि यह अत्यंत शुभ रहेगा।
चेतन पांंडेय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर इस बार दिन में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और रात में श्रवण नक्षत्र भोग कर रहा है। यह नक्षत्र भगवान शिवजी को अत्यंत प्रिय है।




