रांची (पंडरा): पंडरा के चटकपुर में आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन रविवार को ऐतिहासिक उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोग एकत्रित हुए। इस मौके पर वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और छुआछूत मुक्त समाज के संकल्प को दोहराया।

चिन्मय आश्रम, रांची के स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती जी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। बच्चों को संस्कारवान और योग्य बनाने, परंपराओं जैसे तिलक-जनेऊ का गर्व से पालन करने तथा धन का सदुपयोग समाज-धर्म कार्यों में करने पर जोर दिया। अतिथि सत्कार और दान को सौभाग्य बताते हुए उन्होंने एकजुट समाज की अपील की।
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अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका एवं मुख्य वक्ता सुनीता ताई हल्देकर ने हिंदू समाज को विश्व का सबसे उदार समाज बताया। ‘रघुकुल रीति’ का स्मरण कराते हुए उन्होंने नारी शक्ति के विस्तार, भारत माता की प्रतिष्ठा और सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मंदिर, श्मशान और जल स्रोतों पर सभी का समान अधिकार हो भेदभाव मुक्त समाज बनाएं।” पंच परिवर्तन से व्यक्ति निर्माण और सुदृढ़ परिवार व्यवस्था पर बल दिया।
सम्मेलन का मुख्य संदेश रहा ‘विविधता में एकता’। महाकुंभ की तुलना देते हुए वक्ताओं ने जीवन के हर क्षेत्र में एकजुट रहने का आह्वान किया। समापन राष्ट्रव्यापी भाव “मैं रहूँ या न रहूँ, मेरा समाज रहे” गीत के एवं भारत माता की आरती के साथ संपन्न हुआ। यह सम्मेलन हिंदू समाज की एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना। उक्त जानकारी प्रचार व्यवस्था प्रमुख आलोक मिश्र ने दी।




