रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्त्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर हर हाल में रोक लगाई जाए। गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा जैसे जगहों पर बाल विवाह के ज्यादा मामले देखने और सुनने को मिल रहे हैं, ऐसे जगहों पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करें। बाल विवाह को बढ़ावा देने वालों और इसमें शामिल लोगों पर की जाने वाली कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी आमजनों को दें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि ऑडियो-वीडियो के माध्यम से और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी लोगों में प्रभावी जागरूकता लाई जा सकती है।
साथ ही स्कूल-कॉलेज की छात्राओं सहित आम लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह मुक्त झारखंड की दिशा में अपनी साहस और दृढ़संकल्प को दिखाने वाली बालिकाओं को ब्रांड एम्बेसडर-वॉलेंटियर बनाकर समाज में जागरूकता फैलाएं, ताकि बालिकाओं के अल्प आयु में विवाह करने की सामाजिक विसंगति पर रोक लगाई जा सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विभाग की ओर से संचालित योजनाओं में तेजी लाते हुए विकास की किरणें समाज के अंतिम पायदान के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभाग अपने केन्द्रांश और राज्यांश बजट का पूर्ण व्यय करते हुए योजनाओं का सीधा लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत रिक्त पदों को भरने के लिए नियुक्ति प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग अंतर्गत सीडीपीओ के 106 पद, महिला पर्यवेक्षिका के 433 पद, आंगनबाड़ी सेविका के 583 पद एवं आंगनबाड़ी सहायिका के 897 पद रिक्त हैं, इन पदों पर नियुक्ति की जानी है।
मिशन मोड में मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाएं
मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर मिशन मोड में मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाएं। आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण के लिए सीएसआर और डीएमफटी फंड का उपयोग कर पहले जीर्ण-शीर्ण एवं किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट कराना सुनिश्चित करें। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करें। राज्य सरकार की सोच है कि अधिक से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र अपने भवन में संचालित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, शौचालय और पेयजल आपूर्ति की बेहतर सुविधा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि किराए पर संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालय परिसरों में शिफ्ट किए जाने का कार्य भी विभाग की ओर से किया जा रहा है। इससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा और इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा।
सखी वन स्टॉप सेंटर के उपयोग के प्रति महिलाओं को करें जागरूक
मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि पोषण अभियान योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविकाओं को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के पश्चात पोषण ट्रैकर पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक दिन की गतिविधियों को अपलोड किया जा रहा है।
इससे पर्यवेक्षण में सहूलियत हो रही है। मुख्यमंत्री ने सखी वन स्टॉप सेंटर की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर के उपयोग के प्रति महिलाओं को जागरूक कर विभिन्न हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता दें।
साथ ही इसे स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ जोड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला हेल्पलाइन नंबर को लेकर लोगों में जागरूकता लाएं और इस नंबर पर प्राप्त शिकायतों को तत्परता के साथ निराकरण करना सुनिश्चित की जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री किशोरी कल्याणार्थ के लिए सावत्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, निशक्त कल्याणार्थ योजना अंतर्गत दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना एवं दिव्यांग जनों को विशेष उपकरण उपलब्ध कराए जाने संबंधी कार्य प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए।
बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक समाज कल्याण किरण कुमार पासी, अपर सचिव महिला बाल विकास विभाग अभय नंदन अम्बष्ट, निदेशक आईसीपीएस विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।




