पलामू। एक भूखे और भटके हुए मासूम के मुंह से निकला सवाल-‘भात नहीं है क्या-यह सिर्फ एक बच्चे की भूख की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की हकीकत भी बयां कर गया, जहां आम जनता की सुरक्षा में दिन-रात तैनात पुलिसकर्मी खुद मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
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मामला पलामू जिले के मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र का है। ग्राम बरडंडा में भटकते हुए एक 13 वर्षीय बालक जावेद आलम को ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने शनिवार को अपने संरक्षण में लिया। बताया गया कि बच्चा मंदबुद्धि है और बिना बताए घर से निकल गया था। थाने लाए जाने के बाद जब सुबह भूख से व्याकुल बच्चे ने खाने की मांग की, तो पुलिसकर्मियों ने उसे नाश्ते में चूड़ा और गुड़ दिया। लेकिन बच्चे ने मासूमियत से पूछ लिया-भात नहीं है क्या। इस सवाल का जवाब सुनकर शायद किसी का भी दिल भर आए।
पुलिसकर्मियों ने बच्चे को बताया कि थाने में गैस नहीं होने के कारण लगभग दो सप्ताह से मेस बंद है। यहां तक कि थाना के जवान भी चूड़ा-गुड़ या बाहर होटल में जैसे-तैसे भोजन कर ड्यूटी निभा रहे हैं। बाद में पुलिस ने बच्चे के परिजनों को बुलाकर उसे सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया। लेकिन इस घटना ने मोहम्मदगंज थाना की उस पीड़ा को सामने ला दिया, जो अब तक सरकारी फाइलों के बीच दबकर रह गई थी।
थाना प्रभारी नारायण सोरेन ने बताया कि थाना में गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण मेस बंद पड़ा है। गैस एजेंसी संचालकों ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध कनेक्शन और ओटीपी के सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। पहले आवश्यकता के अनुसार थाना को सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन वर्तमान नियमों के कारण अब यह संभव नहीं हो पा रहा है। थाना प्रभारी के अनुसार, गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए विभाग को पत्राचार भी किया गया है, लेकिन अब तक न तो कनेक्शन स्वीकृत हुआ है और न ही गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया गया है।




