रांची। आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर आदिवासी संगठनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे कांग्रेस गठबंधन सरकार की रैली में तब्दील करने का आरोप लगाया है।
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केंद्रीय सरना समिति सहित विभिन्न आदिवासी संगठनों ने रविवार को संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि शुरुआत में रैली का नाम आदिवासी एकता महाजुटान रैली रखा गया था, लेकिन बाद में चर्च की भागीदारी और आदिवासी संगठनों के विरोध के बीच इसका स्वरूप बदल गया।
संगठनों का आरोप है कि 30 अगस्त तक पहुंचते-पहुंचते महज 12 घंटे के भीतर यह रैली कांग्रेस गठबंधन सरकार की रैली में तब्दील हो गई। उन्होंने इसे चर्च की ओर से आयोजित रैली को कांग्रेस गठबंधन सरकार की राजनीतिक स्वीकृति मिलने के रूप में बताया।
संयुक्त बयान में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की पर भी निशाना साधते हुए उन्हें चर्च का प्रमुख चेहरा और इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड बताया गया। संगठनों ने आरोप लगाया कि आदिवासी नेतृत्व को अपने और चर्च के माध्यम से संचालित करने की मंशा है।
आदिवासी संगठनों ने कहा कि चर्च यदि ईसाई, मसीही, क्रिस्चियन, विश्वासी या ख्रीस्तीय समुदाय के नाम से आंदोलन करता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन आदिवासियों के नाम पर किसी भी आंदोलन का वे पुरजोर विरोध करेंगे।
प्रेस बयान जारी करने वालों में मुख्य रूप से पाहन जगलाल पाहन, बबलू मुंडा, अशोक मुंडा, संदीप उरांव, मेघा उरांव, सोमा उरांव और सन्नी टोप्पो सहित अन्य आदिवासी सामाजिक संगठन के पदाधिकारी प्रतिनिधि शामिल हैं।



