Ranchi : झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान, राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के नए डायरेक्टर के तौर पर डॉ. डी.के. सिन्हा को नियुक्त किया गया है। लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बाद पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद रिम्स के एकेडमिक डीन का काम संभाल रहे डॉ डीके सिन्हा को सरकार ने रिम्स का नया निदेशक बनाया है।
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डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा (जिन्हें डॉ. डी.के. सिन्हा के नाम से जाना जाता है) पेशे से सर्जन हैं और निदेशक बनने से पहले रिम्स में कई अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं। रिम्स (पहले आरएमसीएच) के 1978 एमबीबीएस बैच के छात्र रहे डॉ. सिन्हा ने 1990 में सर्जरी में अपनी पोस्ट-ग्रेजुएट पढ़ाई पूरी की और छह साल तक ग्रामीण इलाकों में मरीजों की सेवा की। डॉ सिन्हा ने कहा कि रिम्स के बारे में लोगों की जो भी राय हो, उनका मानना है कि संस्थान को हर हाल में पटरी पर रहना ही होगा, क्योंकि राज्य की बीमार आबादी के इलाज की बड़ी जिम्मेदारी और जवाबदेही इसी पर है। उन्होंने बताया कि इलाज के लिए रिम्स आने वाले ज्यादातर मरीज गरीब या मध्यम वर्गीय परिवारों से होते हैं। इसलिए, इस पर काम करना है कि उन्हें उनकी उम्मीदों के मुताबिक इलाज मिले।
डॉ सिन्हा ने कहा कि मरीजों के इलाज के लिए रिम्स का बेहतर होना जितना जरूरी है, संस्थान में अच्छी क्वालिटी की मेडिकल पढ़ाई सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है। उन्होंने कहा कि एकेडमिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए फैकल्टी की कमी को दूर करना जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे पर विशेष रूप से काम करने का वादा किया। डॉ सिन्हा ने कहा कि रिम्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना उनकी मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि पहले वह यह देखेंगे कि वर्तमान में किन-किन संसाधनों की जरूरत है। फिर यह कि अगले 10 से 20 वर्षों में हमें जरूरत के हिसाब से किन संसाधनों की तैयारी करनी है, इन सबको ध्यान में रख कर काम करना होगा।
उन्होंने माना कि इमरजेंसी या ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों के परिवारों को सिरिंज या कैथेटर जैसी जरूरी चीजें बाहर से खरीदने के लिए कहना हमारी नाकामी रही है। उन्होंने राज्य के लोगों को भरोसा दिलाया कि रिम्स में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे और यह कोशिश की जाएगी कि मरीजों को सभी जरूरी दवाइयां सीधे अस्पताल से ही मिलें। रिम्स निदेशक ने बताया कि मरीजों की ज्यादा संख्या के कारण, कुछ विभागों में मरीजों का इलाज फर्श पर लिटाकर करना पड़ता है, जो कि बिल्कुल भी ठीक स्थिति नहीं है। इसलिए, वैसे विभाग जिसमें बेड खाली रहता है, उस पर दूसरे विभाग के मरीजों का इलाज सुनिश्चित हो, कार्य योजना बनाकर इस पर वह काम करेंगे। डॉ डीके सिन्हा ने बताया कि रिम्स रिसर्च के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहा है, कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में रिसर्च पेपर पब्लिश हुए हैं। इसे और बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य न सिर्फ रिम्स की पुरानी गरिमा को वापस लाना है, बल्कि इसे और ऊंचाइयों तक ले जाना है, ताकि राज्य के लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।




