भोपाल। जनजातीय समुदाय का भोपाल में डीलिस्टिंग की मांग को लेकर आज (शुक्रवार ) बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समविचारी संगठन जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से यहां भेल दशहरा मैदान में आयोजित डीलिस्टिंग गर्जना रैली में जनजाति समाज के हजारों लोग जुटेंगे। सुबह से जनजातीय बंधुओं का भोपाल पहुंचना शुरू हो गया है। आयोजन में वनवासी समाज के भाई-बहन अपनी परंपरागत वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ शामिल होंगे।
जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक कालू सिंह मुजाल्दा ने बताया कि पिछले 70 वर्षों में जनजाति समाज से मतांतरित होने के बाद जनजातीय अधिकारों का लाभ उठाने वालों के खिलाफ यह रैली है। मतांतरित होने के बाद ऐसे लोग जनजातीय बंधुओं के अधिकारों का लाभ न उठा पाएं, इसके लिए डीलिस्टिंग गर्जना रैली आयोजित की जा रही है। इसमें शामिल होने के लिए प्रदेश के 40 जिलों से हजारों लोग भोपाल पहुंच रहे हैं। यह रैली प्रदेश के जनजातीय समुदाय की भावनाओं का प्रकटीकरण है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक यह अभियान अनवरत जारी रहेगा।
मुजाल्दा ने बताया कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप जनजाति की पात्रता के लिए विशिष्ट प्रकार की संस्कृति पूजा-पद्धति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की गई है। यदि कोई इसको त्यागकर दूसरी पूजा पद्धति और संस्कृति को मानता है तो वह जनजाति के लिये सुनिश्चित लाभ का अधिकारी नहीं रह जाता है। बावजूद इसके नौकरियों, छात्रवृत्तियों एवं शासकीय अनुदान देने के मामले में संविधान की भावनाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 342 में धर्मांतरित लोगों को बाहर करने के लिए देश की संसद अब तक न तो कानून बना पाई है और न ही अब तक इसमें संशोधन के लिये प्रस्ताव पर विचार किया है, जबकि यह मसौदा 1970 के दशक से संसद में ही विचाराधीन है। तत्कालीन सांसद (स्व.) डॉ. कार्तिक बाबू उरांव 1968 में इस संवैधानिक व कानूनी विसंगति को दूर करने के प्रयास लोकसभा भंग होने के कारण असफल हो गए थे। इसे लगातार टाला जाता रहा है।
जनजातीय सुरक्षा मंच के प्रांतीय संयोजक कैलाश निनामा ने डीलिस्टिंग की मांग की वजह को स्पष्ट करते हुए बताया कि धर्मांतरण के बाद जनजाति का सदस्य भारतीय क्रिश्चयन कहलाता है। इसके बाद कानूनन वह अल्पसंख्यक की श्रेणी में आ जाता है। चूंकि संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसलिए धर्मांतरित लोग दोहरी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। इसके कारण सरकार पर दोहरा आर्थिक भार बढ़ता जा रहा है।
डीलिस्टिंग गर्जना रैली के संयोजक सौभाग्य सिंह मुजाल्दा ने बताया कि इस विषय को लेकर जनजातीय सुरक्षा मंच लंबे समय से जागरुकता अभियान चला रहा है। साल 2000 की जनगणना और उसके बाद डा. जेके बजाज के अध्ययन से सामने आए तथ्यों को सामने रखते हुए वर्ष 2009 में राष्ट्रपति को 28 लाख पोस्टकार्ड लिखे गए और सौंपे गए। इसके बाद 2020 में 448 जिलों के जिलाधीशों व संभागीय आयुक्तों के साथ ही राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्रियों से मिलकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर डीलिस्टिंग का अनुरोध किया जा चुका है।
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