PATNA: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद फिलहाल सबसे बड़ा सवाल है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। बिहार की राजनीति आजकल इसी सवालों के इर्द-गिर्द घूम रही है। यह सवाल सिर्फ पटना के राजनीतिक गलियारों तक नहीं बल्कि प्रदेश के गांव-देहात से लेकर शहरों के चौक-चौराहों और सोशल मीडिया तक चर्चा का मुख्य विषय बन चुका है।
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इस समय बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर कई नामों की चर्चा है। प्रमुख नामों में सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और भाजपा विधायक संजीव चौरसिया जैसे कई चेहरे संभावित दावेदार माने जा रहे है। हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को करना है। कई राज्यों में देखा गया है कि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह अपने फैसले से चौकाते रहे हैं। ऐसे में बिहार के लिए कोई ऐसा चेहरा सामने ला सकते हैं, जो अब तक मुख्यधारा की चर्चा से दूर रहा हो, लेकिन संगठन और विचारधारा के स्तर पर मजबूत पकड़ रखता हो।
ऐसे में अभय गिरी नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी के एक गरीब परिवार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने वाले अभय गिरी को भाजपा के भीतर एक अनुशासित और जमीनी नेता के रूप में देखा जा रहा है। संघ पृष्ठभूमि से जुड़े होने के कारण उनका संगठनात्मक अनुभव काफी मजबूत माना जाता है और यही कारण है कि उनका नाम अचानक राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से उभरने लगा है।
बिहार में पिछले कई चुनाव के सूत्रधार रहे लेकिन हमेशा सुर्खियों से दूर रहे है। श्री गिरी ने परदे के पीछे से संगठन को धार दी है। 2009 का लोकसभा, 2010 विधानसभा, 2014 लोकसभा, 2015 विधानसभा, 2019 लोकसभा एवं 2020 विधानसभा, 2024 लोकसभा एवं 2025 विधानसभा के चुनाव एवं विभिन्न उपचुनावों में इनका निरंतर योगदान रहा है। 16 वर्ष तक बिहार को समर्पित कार्यकत्ती के रूप में योगदान दे चुके हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभय गिरी ने भाजपा को अपने जीवन के बहुमूल्य 27 वर्ष दे चुके हैं।
सूत्रों के मानें तो अभय गिरी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी है जो प्रचार से अधिक काम पर भरोसा करते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें सादगी, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता है।
अभय कुमार गिरी, जो गोस्वामी समाज से आते हैं। RSS से लंबे समय से जुड़े हैं। उन्होंने संघ प्रचारक के रूप में काम किया है। अभय गिरी पूर्व में बिहार के सीमांचल क्षेत्र और वर्तमान में मणिपुर में भाजपा के संगठन महामंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। भाजपा के द्वारा बिहार में नीतीश कुमार के बाद एक नया युवा और संघ पृष्ठभूमि का चेहरा लाने के विकल्प के रूप में चर्चा कर रहा है।
दिल्ली से लेकर पटना तक भाजपा के अंदरूनी हलकों में चर्चा है कि पार्टी बिहार में भविष्य की राजनीति को देखते हुए एक ऐसा चेहरा सामने ला सकती है जो संगठन और सरकार दोनों में फीट हो। यही वजह है कि अभय गिरी को संभावित ‘सरप्राइज फैक्टर’ के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक भाजपा की ओर से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।


