रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने वरिष्ठ नेता बैजनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पार्टी की इस घोषणा के साथ ही महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और संभावित मतभेदों को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। वहीं, शनिवार को चार नेताओं द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद चुनावी समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है।
यह भी पढ़े : झारखंड दौरे पर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से राजग नेताओं ने की मुलाकात, दीं शुभकामनाएं
झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने शनिवार को रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बैजनाथ राम के नाम की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। झामुमो की ओर से उम्मीदवार के नाम की घोषणा के साथ ही यह संकेत भी मिला है कि महागठबंधन राज्यसभा चुनाव को लेकर एकजुट है।
राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद उभर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस और झामुमो द्वारा एक-एक उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने से गठबंधन की एकता का स्पष्ट संदेश गया है। इससे यह भी संकेत मिला है कि चुनाव को लेकर दोनों दल साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा अभी भी जारी है कि झामुमो भविष्य में एक और उम्मीदवार उतारने पर विचार कर सकता है। इसके बावजूद मौजूदा स्थिति में गठबंधन के भीतर संतुलन और समन्वय मजबूत दिखाई दे रहा है।
उम्मीदवारों के चयन के जरिए महागठबंधन ने सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास भी किया है। कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि झामुमो ने पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले बैजनाथ राम पर भरोसा जताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने और व्यापक राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है।
इस बीच झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए शनिवार को चार नेताओं द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने से चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। नामांकन पत्र खरीदने वालों में कांग्रेस के प्रणव झा, झामुमो के बैजनाथ राम के अलावा गौरव वल्लभ और परिमल नाथवानी शामिल हैं। इन नामों के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में संभावित मुकाबले और नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गौरव वल्लभ और परिमल नाथवानी द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने को लेकर भी विभिन्न तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम रूप से कौन-कौन उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे, लेकिन नामांकन प्रक्रिया ने राज्य की राजनीति में उत्सुकता बढ़ा दी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर झामुमो ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी केवल आदिवासी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही पार्टी ने परिवारवाद के आरोपों से दूरी बनाते हुए व्यापक सामाजिक भागीदारी और समावेशी राजनीति का संकेत भी दिया है।
राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर आगे की रणनीति और संभावित चुनावी समीकरणों पर टिकी है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम सूची और दलों की राजनीतिक चालें झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती हैं।




