गुमला: विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन गुरुवार को गुमला जिले के रायडीह प्रखंड अंतर्गत कोंडरा गांव के रामनवमी बगीचा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी श्री अखंड दास जी महाराज एवं मुख्य वक्ता के तौर पर आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक एवं हिन्दू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री उत्तर पूर्व एवं पूर्व क्षेत्र डॉ सुमन कुमार, प्रांत संघचालक सच्चिदानंद अग्रवाल, गुमला विभाग के संघचालक साहू प्रकाश लाल थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में जसपुर के राजा आदित्य जूदेव सिंह, बीरूगढ़ के राजा दुर्ग विजय सिंह, हिन्दू जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम शर्मा मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी उमाकांत महाराज जी राम रेखा धाम ने किया वहीं मंच संचालन गुमला जिला कार्यवाह लक्ष्मी ने किया।
डॉ सुमन कुमार का बेड़ों, सिसई, रायडीह में स्वागत किया गया। उन्होंने विर व्यक्तरसाय मुंडन सिंह चौक में माल्यार्पण किया। मँझाटोली, बीरकेरा में स्वागत हुआ। मोकरा में वीर तेलंगा खड़िया के प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
विराट हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. सुमन कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की साधना के 100 वर्ष पूरे हो गए है।
संघ की स्थापना के पिछे का उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित कर उसे राष्ट्र की सेवा के लिए प्रेरित करना था। एक शताब्दी की इस लंबी यात्रा में संघ की विचारधारा और कार्यप्रणाली का एक ही मूल मंत्र रहा, वह है ‘राष्ट्र प्रथम ’। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि संघ के हर स्वयंसेवक के जीवन का अटूट संकल्प है।
संघ की विचारधारा के केंद्रीय तत्व ‘राष्ट्र प्रथम ’ने स्वयंसेवकों ने जाती क्षेत्र और भाषा के कृत्रिम विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया है। जिस समय देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, उसी समय आद्य सरसंघचालक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने यह पहचान लिया था कि व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि संघ केवल एक संगठन भर नहीं, बल्कि एक विराट जीवन दर्शन है, जिसकी आधारशिला राष्ट्र प्रथम के ध्येय पर टिकी हुई है। सौ वर्ष की यात्रा के बाद संघ सामाजिक –सांस्कृतिक संगठन के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। जिसकी जड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकाश और सामाजिक समरसता जैसे अनेक क्षेत्रों में फैल चुकी है। वर्तमान समय में जब देश को वैश्विक चुनौतियों, सांस्कृतिक अतिक्रमण और सामाजिक विभाजन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में संघ की एकात्मवादी सोच और राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत और भी अधिक प्रसांगिक हो जाता है।
डॉ. सुमन ने कहा कि संघ की यह शताब्दी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि किसी भी संगठन की दीर्घायु और प्रभाव किसी क्षणिक सफलता पर नहीं, बल्कि विचारधारा की शुद्धता और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर निर्भर करते है। संघ की साधना का फल यह है कि आज राष्ट्र प्रथम की भावना देश के कोने –कोने में गूंज रही है। संघ ने अपने शताब्दी वर्ष की दहलीज तक पहुंचते पहुंचते यह सिद्ध कर दिया है कि उसके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि है। चाहे वह स्वतंत्रता संग्राम हो, देश के विभाजन की पीड़ा हो या आजादी के बाद देश के सामने आई विभिन्न चुनौतियां।
उन्होंने कहा कि केवल बाहरी रूप के आधार पर संघ का मूल्यांकन करने से गलतफहमियां पैदा होती है। संघ की शाखा, कार्यकर्ता, उनका परिवार, कार्यक्रम,वर्ग, शिविर इनका सूक्ष्म निरीक्षण प्रत्यक्ष रूप से करने पर ही संघ को सही रूप से समझा जा सकता है। संघ का कार्य देश के लिए है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा करने या किसी को प्रतिक्रिया के कारण नहीं चलता। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ सता या प्रसिद्धि की आकांक्षा नहीं रखता।
उन्होंने कहा कि संघ संस्थापक डॉ हेडगवार ने स्वतन्त्रता आंदोलन की सभी धाराओं का अनुभव और चिंतन किया। इतिहास में भी बार –बार गुलाम बने। पराक्रम से स्वतंत्रता वापस पाई, लेकिन वह टिक नहीं सकी। अब भी हमें स्वतंत्रता मिलेगी, लेकिन फिर से गुलामी नहीं आएगी, इसकी क्या गारंटी है? हमारे समाज में कुछ कमी है, इसे डॉ हेडगेवार ने पहचाना। हम अपनी एकता भूल गए, स्वार्थ बढ़ गया, समाज गुणहीन बन गया, अनुशासन नहीं रहा। दरिद्रता,गरीबी और अज्ञान उत्पन हुआ। समाज को गुणवान, अनुशासित, समृद्ध और संगठित बनाए बिना स्वतंत्रता को टिकाया नहीं जा सकता। इसी उद्देश्य से डॉ हेडगेवार ने विभिन्न प्रयोगों के पश्चात 1925 में संघ की स्थापना की।
डॉ. सुमन ने कहा कि आज वर्तमान में संघ का कार्य कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल प्रदेश तक भारत के हर कोने तक पहुंच चुका है। संपूर्ण भारत के कुल 924 जनपदों में से 98.3 प्रतिशत जिलों में संघ की शाखाएं चल रही हैं। कुल 6618 खण्डों में से 92.3 प्रतिशत खण्डों में, कुल 58939 मंडलों में से 52.2 प्रतिशत मंडलों में 51740 स्थानों पर 83129 दैनिक शाखाएं तथा अन्य 26460 स्थानों पर 32147 साप्ताहिक मिलन के माध्यम से संघ कार्य का देश व्यापी विस्तार हुआ है।
डॉ. सुमन कुमार ने कहा कि वर्तमान चुनौतियो से डटकर सामना करने के लिए हमें संगठन विस्तार करना है। संगठन विस्तार समय की मांग है समाज को सशक्त बनाने के लिए संगठित करना अति आवश्यक है। आपसी मतभेदों को भूलकर हमे राष्ट्रीय चेतना का संचार करना है।
आज के युवा ही देश के भविष्य है इसलिए राष्ट्रहित में युवा आगे आए। राष्ट्र रक्षा सभी के लिए सर्वोपरि होना चाहिए। युवा शक्ति देश के लिए शुभ है। युवा राष्ट्र के पूंजी समान है। सभी युवाओं को राष्ट्रहित के लिए अपने जीवन को आहुत करना चाहिए। राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तभी व्यक्ति का जीवन सुरक्षित रह पाएगा। सभी अपने स्वार्थ को त्यागे और देश हिट में आगे आए। देश की रक्षा सभी के लिए प्राथमिकता में रहे।
धर्मांतरण से राष्ट्रांतरण, भविष्य के लिए खतरा
डॉ. सुमन कुमार ने कहा कि एक व्यक्ति के द्वारा धर्मांतरण होने से उसके मूल चरित्र का राष्ट्रांतरण हो जाता है फिर वो व्यक्ति यहां के धर्म रीति रिवाज, तीज-त्योहारों के परिपाटी का पूरी तरह दुश्मन बन जाता है। निहितार्थ ये है जितना धर्मांतरण होगा उतना देश और समाज के दुश्मन पैदा होंगे इस तरह से राष्ट्र के आंतरिक सुरक्षा के लिए भी धर्मांतरण बहुत बड़ी चुनौती है इसे हर हाल में रोकने की आवश्यकता है। सेवा के आड़ में ईसाई मिशनरियां समाज को धोखा दे रही है।
इस कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए।


