देहरादून : 20,700 फुट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश के दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। जहां पहले यात्रा तय करने में 10 दिन लगते थे, वहीं अब श्रद्धालु पांच घंटे में ही यात्रा पूरी कर ले रहे हैं। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि पिथौरागढ़ के जॉलजिबी से आदि कैलाश तक 65 किलोमीटर की आॅल वेदर रोड बन चुकी है। पहले जॉलजिबी से गूंजी (आदि कैलाश) तक 10 दिन लगते थे। अब 5-6 घंटे लग रहे हैं। 4 मई को शुरू हुई यात्रा नवंबर तक चलेगी। कैलाश मानसरोवर यात्रा दो से तीन सप्ताह तक चलती है। हालांकि, यह इस पर निर्भर करता है कि आप यात्रा कहां से शुरू करते हैं। भारत सरकार ने इस यात्रा को आसान बनाने के लिए ‘लिपुलेख मार्ग’ बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई 2020 को इस मार्ग का उद्घाटन किया था।
कैलाश पर्वत श्रेणी कश्मीर से भूटान तक फैली हुई है। इस शिखर का आकार एक विशाल शिवलिंग जैसा है। हिंदू धर्म में इसकी परिक्रमा का बड़ा महत्व है। परिक्रमा 52 किमी की होती है। वहीं, तिब्बत के लोगों का मानना है कि उन्हें इस पर्वत की 3 या फिर 13 परिक्रमा करनी चाहिए। वहीं, तिब्बत के कई तीर्थ यात्री तो दंडवत प्रणाम करते हुए इसकी परिक्रमा पूरी करते हैं। उनका मानना है कि एक परिक्रमा से एक जन्म के पाप दूर हो जाते हैं, जबकि दस परिक्रमा से कई अवतारों के पाप मिट जाते हैं। जो 108 परिक्रमा पूरी कर लेता है उसे जन्म और मृत्यु से मुक्ति मिल जाती है।
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