रांची। रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार दो आरोपितों राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक की जमानत याचिका पर मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 जून की तिथि निर्धारित की है।
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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गत 7 अप्रैल को इस मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपितों में राजकिशोर बड़ाईक और कार्तिक बड़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमार शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, सभी आरोपितों ने आपसी मिलीभगत से रिम्स की अधिग्रहीत सरकारी जमीन को निजी संपत्ति साबित करने के लिए फर्जी वंशावली और दस्तावेज तैयार किए थे। एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों ने जमीन के मूल रिकॉर्ड में हेरफेर कर कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश की। मामले में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को संरक्षण देने का प्रयास किया गया।
यह मामला वर्ष 1964-65 में रिम्स के लिए अधिग्रहीत करीब 9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस जमीन पर वर्षों तक अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकानें और मकान बना लिए गए थे। बाद में झारखंड उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई और अदालत के आदेश पर अवैध निर्माणों को ध्वस्त भी किया गया था।
झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद एसीबी ने 5 जनवरी को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ाते हुए संबंधित लोगों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के दौरान कई तथ्यों के सामने आने के बाद चारों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।
मामले को लेकर एसीबी की ओर से अदालत में कहा गया है कि यह केवल जमीन कब्जे का मामला नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों में गंभीर फर्जीवाड़ा और प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास भी है। वहीं बचाव पक्ष की ओर से आरोपितों को निर्दोष बताते हुए जमानत देने की मांग की जा रही है। अब इस चर्चित मामले में सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।



