पश्चिम चम्पारण(बगहा)। पश्चिम चंपारण जिला के बगहा नदी थाना क्षेत्र अंतर्गत चिउरही पंचायत में गंडक नदी का कटाव लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। कटाव की ताजा जद में आने के बाद करीब 7.50 लाख रुपया की लागत से निर्मित कचड़ा भवन पूरी तरह नदी में समा गया। भवन के नदी में विलीन होने के बाद फिलहाल कटाव की रफ्तार कुछ धीमी हुई है।
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गंडक नदी के जलस्तर में भारी कमी को देखते हुए जल संसाधन विभाग के बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल ने कटाव निरोधी फ्लड फाइटिंग कार्य को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। विभागीय बाढ़ विशेषज्ञ अशोक कुमार केसरी के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। विभाग की टीम नदी के रुख और कटाव की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
54 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के सहायक अभियंता विकास कुमार ने बताया कि रविवार सुबह वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब 54 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया। जलस्तर में लगातार गिरावट के कारण फिलहाल कटाव की स्थिति में भी कमी आई है। हालांकि, नदी के बदलते रुख को देखते हुए विभाग पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है।कटाव स्थल पर कनीय अभियंता पप्पू कुमार और राजेश कुमार लगातार कैंप कर निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार नदी के जलस्तर में दोबारा वृद्धि अथवा कटाव तेज होने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।
सरकारी संपत्तियों के बाद अब कचरा भवन भी नदी में समाया
चिउरही पंचायत में गंडक नदी का कटाव पहले भी बड़े पैमाने पर तबाही मचा चुकी है। कटाव की चपेट में आकर प्राथमिक विद्यालय उर्दू की बाउंड्री, पैक्स गोदाम और सात निश्चय योजना के तहत निर्मित पानी की टंकी पहले ही नदी में विलीन हो चुकी है। अब करीब 7.50 लाख रुपया की लागत से बना कचराभवन भी नदी की धारा में समा गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार कटाव के कारण सड़क के साथ 70 से अधिक घर नदी में कटकर बह चुके हैं। इसके अलावा लगभग 500 एकड़ में लगी धान और गन्ना की फसल भी गंडक की धारा में समा चुकी है। इससे ग्रामीणों के सामने आवास के साथ-साथ आजीविका की भी गंभीर संकट खड़ी हो गयी है।
पॉलीथिन शीट के सहारे कटाव पीड़ित परिवार
कटाव से विस्थापित परिवार फिलहाल पॉलीथिन शीट के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि घर और उपजाऊ जमीन गंवाने के बाद भी उन्हें अब तक बासगीत पर्चा नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि स्थायी पुनर्वास के बिना हर वर्ष गंडक का कटाव उन्हें नए संकट में धकेल देता है।
नैनहा चेकपोस्ट के समीप सरकारी जमीन अधिग्रहण को लेकर अनुमंडल पदाधिकारी चांदनी कुमारी ने मधुबनी अंचलाधिकारी नंदलाल राम को आवश्यक निर्देश दिया है। हालांकि, स्थानीय कटाव पीड़ितों का कहना है कि उन्हें अब तक तत्काल राहत के तौर पर पॉलीथिन शीट के अलावा स्थायी आवास और जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस समाधान का इंतजार है।
ग्रामीणों की मांग है कि कटाव रुकने के बाद भी विभाग इस क्षेत्र में स्थायी कटावरोधी उपायों और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की ठोस योजना तैयार करे, ताकि हर साल गंडक की धारा के साथ उनके घर, खेत और सरकारी परिसंपत्तियां न बहें।


