पूर्वी सिंहभूम। कदमा स्थित एयर बेस कॉलोनी के ब्रह्मलोकधाम में रविवार को गुरुजी और गुरुमां के जन्मोत्सव के अवसर पर सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया।
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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और ब्रह्मलोकधाम के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस समारोह में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 50 जनजातीय जोड़े विवाह के बंधन में बंधे। इनमें दिव्यांग कुसुम मंडा के साथ अनिता उरांव और लक्ष्मण उरांव सहित अन्य जोड़े भी शामिल रहे। समारोह का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह के खर्च से राहत दिलाना और जरूरतमंदों को सामाजिक सहयोग प्रदान करना था।
ब्रह्मलोकधाम के संचालक मोनु भट्टाचार्य ने बताया कि जय श्री गुरु और जय श्री मां के उद्घोष के साथ जन्मोत्सव मनाया गया। इसी अवसर पर सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसंत कुमार मित्तल और उनके सहयोगियों का सहयोग प्राप्त हुआ।
मोनु भट्टाचार्य ने ब्रह्मलोकधाम की स्थापना से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1928 में परिवार की एक बुजुर्ग महिला को स्वप्न आने के बाद केदारनाथ मंदिर जाने का प्रसंग सामने आया था। मान्यता के अनुसार, वहां आकाशवाणी के माध्यम से परिवार में भगवान शिव के आगमन का संदेश मिला था। इसके बाद ब्रह्मलोकधाम की परंपरा आगे बढ़ी।
अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसंत कुमार मित्तल ने कहा कि वर्ष 2025 में 25 जोड़ों का विवाह कराया गया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़ाकर 50 कर दी गई। झारखंड प्रांत के सेवा प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटियों और बेटों की शादी कराने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे परिवारों की मदद के उद्देश्य से सामूहिक विवाह की परंपरा पिछले दस वर्षों से जारी है। उनके अनुसार, इस पहल के तहत अब तक लगभग 3,500 विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं।
समारोह में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रमुख देवेंद्र गुप्ता, अग्रवाल जिला सम्मेलन के अध्यक्ष मंटू अग्रवाल, सुशील लखल, मनीष अग्रवाल, ज्योति कुमारी, सपना और विहिप के दिलीप श्रीवास्तव सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में सभी नवविवाहित जोड़ों को घरेलू उपयोग की वस्तुएं भेंट की गईं। बिरसासेव नयास की ओर से सभी जोड़ों को विवाह प्रमाणपत्र दिए गए।
आयोजकों के अनुसार, प्रत्येक जोड़े को लगभग 10 हजार रुपये मूल्य के घरेलू सामान के साथ 1,100 रुपये नकद दिए गए। आयोजकों ने कहा कि सामूहिक विवाह के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता देने के साथ सामाजिक सहयोग और सेवा की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।



