नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई), 2023 के संबंध में भ्रामक विज्ञापन जारी करने के लिए वाजिराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अंतिम आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने पाया कि संस्थान ने जानबूझकर अपने विज्ञापनों में महत्वपूर्ण जानकारी विशेष रूप से सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम को छिपाया था।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने गौर किया कि संस्थान ने उपरोक्त दावों को प्रकाशित करते हुए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विभिन्न पाठ्यक्रमों का विज्ञापन भी किया, जिनमें शामिल हैं: जीएस/पूर्ण पाठ्यक्रम/फाउंडेशन पाठ्यक्रम, प्री-फाउंडेशन पाठ्यक्रम, सप्ताहांत पाठ्यक्रम, वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम और जीएस प्री-कम-मेन्स पाठ्यक्रम। इन प्रस्तुतियों ने उपभोक्ताओं के बीच एक भ्रामक धारणा पैदा कर दी कि सभी सफल उम्मीदवारों ने संस्थान द्वारा विज्ञापित इन नियमित पाठ्यक्रमों में दाखिला ले लिया था।
जानबूझकर जानकारी छिपाने से उपभोक्ताओं को यह तय करने में कठिनाई होती है कि वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के किस चरण में किस पाठ्यक्रम में दाखिला लें। सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों के बारे में सही और स्पष्ट जानकारी देने से उम्मीदवारों को शैक्षणिक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाना छिपाव के समान है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(9) के अंतर्गत उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने आगे कहा कि वाजिराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर पहले भी यूपीएससी सीएसई 2022 के परिणामों से संबंधित भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए कार्रवाई की गई थी और उन पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। पूर्व नियामक हस्तक्षेप और चेतावनी के बावजूद , संस्थान ने अपने बाद के विज्ञापनों में भी इसी तरह के दावे करना जारी रखा, जो उचित सावधानी और नियामक अनुपालन की कमी को दर्शाता है।
29 कोचिंग संस्थानों पर 1,24,60,000 रुपये का जुर्माना
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने अब तक, भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार तरीकों के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी किए हैं। 29 कोचिंग संस्थानों पर 1,24,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें इस तरह के भ्रामक दावों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में महत्वपूर्ण जानकारी का सत्य, पारदर्शी और पूर्ण प्रकटीकरण सुनिश्चित करना चाहिए जिससे छात्रों को निष्पक्ष और सूचित शैक्षणिक निर्णय लेने में मदद मिल सके।



