RANCHI: झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा से निकलकर बिहार विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचने वाले ब्रज मोहन राम अब ओडिशा के राज्यपाल बन गए हैं। ग्रामीण परिवेश से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर राज्य की राजनीति से होते हुए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और अब उन्हें संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिली है।
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ब्रज मोहन राम लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा में भी अपनी जगह बनाई। वह 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। संसद में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कोयला, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण से जुड़ी समितियों में भी भागीदारी निभाई। ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति उनके सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
चंदवा में जन्म, लोहरदगा में हुई शिक्षा
ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था। वर्तमान में चंदवा झारखंड के लातेहार जिले का हिस्सा है। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी था।
ग्रामीण परिवेश से आने वाले ब्रज मोहन राम का पेशा कृषि रहा है। उन्होंने लोहरदगा स्थित बीएस कॉलेज से बीए की पढ़ाई की। पांच मार्च 1979 को उनका विवाह लीला देवी से हुआ। उनके तीन बेटे हैं।
जिस समय उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की, उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और पलामू बिहार का हिस्सा था। इसी क्षेत्र से निकलकर उन्होंने बिहार की राजनीति में पहचान बनाई और बाद में राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
लातेहार विधानसभा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
ब्रज मोहन राम के राजनीतिक जीवन का शुरुआती महत्वपूर्ण पड़ाव बिहार विधानसभा रहा। वह 1991 से 1995 तक लातेहार विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।
विधानसभा में अपने कार्यकाल के बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा और वह राष्ट्रीय राजनीति की ओर अग्रसर हुए। वर्ष 1996 में उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया।
1996 से 2004 तक लगातार तीन लोकसभाओं के सदस्य
ब्रज मोहन राम वर्ष 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद 1998 में 12वीं लोकसभा और 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए भी चुने गए। इस तरह उन्होंने लगातार तीन लोकसभाओं में सांसद के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
संसद में अपने कार्यकाल के दौरान उनकी भागीदारी कोयला, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण से संबंधित समितियों में रही। इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्हें संसदीय कामकाज और विभिन्न नीतिगत विषयों पर काम करने का अनुभव मिला।
बिहार विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का सफर तय करने वाले ब्रज मोहन राम के लिए ओडिशा का राज्यपाल बनना उनके सार्वजनिक जीवन में एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। चंदवा से शुरू हुआ उनका सफर अब एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंच गया है।


