RANCHI: हिंदू समाज की एकता, जागरण और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार को रांची महानगर में टाटीसिलवे, डोरण्डा एवं कडरू कपिलदेव मैदान मे विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इन सम्मेलनों में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन में समाज के बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं सज्जन वृंद उपस्थित रहे। तीनों कार्यक्रम मे लगभग 11 00 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी सत्यनारायण सौमित्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल संदेश “धर्मो रक्षति रक्षितः”है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को अपनी पहचान, अपने इतिहास और अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। यदि समाज संगठित और जागृत रहेगा तो कोई भी शक्ति उसे कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

निशा उरांव ने सरना और सनातन परंपराओं के संबंध पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आदिवासी समाज और सनातन समाज की जड़ें एक ही सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही परंपराएं प्रकृति को पूजनीय मानती हैं और धरती को माता के रूप में सम्मान देती हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज की पूजा पद्धति और परंपराएं अत्यंत प्राचीन हैं और इन्हें संरक्षित रखने की आवश्यकता है। निशा उरांव ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता विविधता में एकता है। अलग-अलग पूजा पद्धतियों और परंपराओं के बावजूद सभी का लक्ष्य मानवता, प्रकृति और समाज के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाना है।
मुख्य वक्ता आरएसएस के रांची महानगर कार्यवाह रा स्व सं दीपक ने कहा कि जाति, वर्ग या क्षेत्र के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव समाज को कमजोर करता है। भारतीय संस्कृति का मूल संदेश सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम् है।
कार्यक्रम के दौरान उत्साह और प्रेरणा का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने एकजुट होकर समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से भारत माता की आरती की। आरती के साथ ही देश, समाज और संस्कृति की उन्नति तथा विश्व शांति की कामना की गई। इसके पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
इस प्रकार उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक जागरूकता से परिपूर्ण यह विराट हिंदू सम्मेलन समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।




